बैंकिंग सुरक्षा में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ OTP नहीं! डिजिटल बैंकिंग में आएगा मल्टी लेयर सिक्योरिटी सिस्टम
Digital Banking Fraud: डिजिटल बैंकिंग में अब सिर्फ ओटीपी पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। नए सिस्टम में चेहरा, फिंगरप्रिंट और व्यवहार आधारित सत्यापन से सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।
- Written By: रूपम सिंह
online verification (सौ.AI)
Sambhajinagar Online Banking Fraud: छत्रपति संभाजीनगर पिछले कुछ वर्षों में ‘मोबाइल पर आया ओटीपी किसी के साथ साझा न करें यह चेतावनी हर बैंक ग्राहक के लिए आम हो गई है। लेकिन अब केवल ओटीपी आधारित सुरक्षा व्यवस्था को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। इस कारण डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत अब ग्राहक की पहचान दो या उससे अधिक स्तरों पर सत्यापित को जाएगी।
इसमें मोबाइल की पहचान, ग्राहक का चेहरा, फिंगरप्रिंट, लेन-देन की आदतें, इस्तेमाल किया गया उपकरण व व्यवहार की लोकेशन जैसी जानकारियां शामिल होंगी। यानी भविष्य में केवल ओटीपी मिलने भर से कोई भी लेन-देन तुरंत पूरा नहीं होगा। देश में ऑनलाइन लेन-देन की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
साथ ही आर्थिक धोखाधड़ी के तरीके भी अधिक तकनीकी होते जा रहे हैं। फजों ग्राहक सेवा केंद्र, नकली केवाईसी संदेश, स्क्रीन शेयरिंग ऐप, मोबाइल कंट्रोल सिस्टम व फर्जी वेबसाइटों के जरिए बैंकिंग जानकारी हासिल कर लाखों रुपये की ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
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कई मामलों में यह भी देखा गया कि ग्राहक के पास मोबाइल होने के बावजूद उनके खातों से लेनदेन हो गया। इससे यह धारणा बदल रही है कि ‘ओटीपी आया मतलब लेनदेन सुरक्षित है।’ अब बैंकिंग क्षेत्र यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है कि लेन-देन करने वाला व्यक्ति वास्तव में खाताधारक ही है या नहीं।
आर्थिक धोखाधड़ी पर अब लगेगी लगाम
अब तक अधिकांश ऑनलाइन ट्रांजैक्यान कार्ड नंबर, ओटीपी व पिन के आधार पर मंजूर किए जाते थे। लेकिन अब बैंक और फिनटेक कंपनियां दोहरी सुरक्षा जांच को और अधिक मजबूत बना रही हैं। जून 2026 से इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
नई सुरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्राहक के खाते को किसी विशेष मोवाइल डिवाइस से स्थायी रूप से जोड़ना होगा। यदि अचानक किसी दूसरे मोबाइल से लेन-देन शुरू होता है, तो अतिरिक्त सत्यापन किया जाएगा। इससे चोरी हुए मोबाइल से लेन-देन करना मुश्किल हो जाएगा व फर्जी ऐप के जरिए खाते में प्रवेश रोका जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है।
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एआई रखेगा हर गतिविधि पर नजर
नई प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग भी बढ़ाया जा रहा है। यह तकनीक ग्राहक के लेन-देन के पैटर्न को समझेगी व अचानक असामान्य गतिविधि होने पर सतर्क हो जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई ग्राहक हमेशा छत्रपति संभाजीनगर से लेन-देन करता है और अचानक किसी दूसरे राज्य से ट्रांजैक्शन होता है, तो सिस्टम उसे संदिग्ध मान सकता है। इसी तरह, यदि छोटे-छोटे लेन-देन करने वाले खाते से अचानक बड़ी राशि भेजी जाती है या आधी रात को लगातार ट्रांजेक्शन शुरू हो जाते हैं, तो प्रणाली अतिरिक्त जांच की मांग कर सकती है।
