छत्रपति संभाजीनगर: सलीम अली सरोवर बदहाली की कगार पर, 4 करोड़ का सौंदर्यकरण फेल?
Sambhajinagar Salim Ali Lake Pollution: संभाजीनगर का सलीम अली सरोवर अतिक्रमण और गंदगी के कारण बदहाल हो गया है। 4 करोड़ के सौंदर्याकरण के बावजूद परिसर जर्जर स्थिति में पहुंच गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
सलीम अली सरोवर, खिजरी तालाब, (सोर्स: सौजंय AI)
Sambhajinagar Encroachment Pollution: छत्रपति संभाजीनगर शहर की प्राकृतिक सुंदरता व पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र ऐतिहासिक सलीम अली सरोवर (खिजरी तालाब) अतिक्रमण, गंदगी व अनदेखी के कारण बदहाली का शिकार हो गया है। पर्यावरण संरक्षण व पर्यटन विकास के नाम पर यहां 4 करोड़ रुपए की लागत से सौंदर्याकरण के कार्य किए गए थे, लेकिन अब यह पूरा परिसर जर्जर हालत में नजर आ रहा है। न्यायालय के निर्देशों के बाद पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगने का हवाला देते हुए मनपा ने सरोवर की देखभाल से हाथ खींच लिया है।
60 फीट ऊंचा बर्ड वॉच टावर बना शो पीस
नतीजतन, पक्षियों के अवलोकन के लिए बना 60 फीट ऊंचा बर्ड वॉच टावर अब खुद खतरे का कारण बन गया है। आसपास की सुरक्षा दीवारें टूट चुकी हैं, लकड़ी व लोहे की जालियां गायब या क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जबकि प्रवेश द्वार पर लगी महंगी लाइटें चोरी हो गई हैं।
रात के समय पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहता है, सुरक्षा गार्ड की अनुपस्थिति से लोग बंद रास्तों के बावजूद अंदर प्रवेश कर रहे हैं व तालाब किनारे बैठकर मछली पकड़ रहे हैं।
सम्बंधित ख़बरें
यवतमाल में पीएम-किसान के 33 हजार लाभार्थियों का ‘फार्मर आईडी’ लंबित; 20 मई तक प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य
नागपुर में प्रदूषण पर सख्ती, बिना शुद्धिकरण नदी में छोड़ा जा रहा गंदा पानी; दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश
पुणे जमीन घोटाला: पार्थ पवार की कंपनी को भरना ही होगा 23 करोड़ का भारी जुर्माना; जानें क्या है पूरा मामला
अकोला में 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा, बिजली की मांग में 30% का उछाल; ट्रिपिंग और लोड बढ़ने से नागरिक बेहाल
मुगल काल की झील पक्षियों का रही ठिकाना
मुगल काल में निर्मित यह झील, जो कभी विविध दुर्लभ पक्षियों का ठिकाना थी। अब गाद व जलकुंभी से जूझ रही है। लगातार अनदेखी से यह धरोहर विलुप्त होने की कगार पर है। सरोवर की जैव विविधता भी खतरे में है।
यह भी पढ़ें:- नागपुर में प्रदूषण पर सख्ती, बिना शुद्धिकरण नदी में छोड़ा जा रहा गंदा पानी; दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश
झील में प्लास्टिक, थर्माकोल, शराब की बोतलें व अन्य कचरा फेंका जा रहा है। गंदगी के कारण पानी से दुर्गंध उठ रही है, जिससे यहां आने वाले दुर्लभ पक्षियों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।
