छत्रपति संभाजीनगर नल मीटर (डिजाइन फोटो)
Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation News: छत्रपति संभाजीनगर शहर के घरेलू व व्यावसायिक नलों पर मीटर लगाने के प्रस्ताव को राज्य सरकार ने मंजूरी दी है। प्रशासक काल में मंजूर कर शासन को भेजे गए इस प्रस्ताव पर मुंबई में हुई जलापूर्ति संबंधी बैठक में अंतिम मुहर लगाई गई। अब 450 करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया के शीघ्र शुरू होने की संभावना है।
इस योजना के तहत शहर में 2 लाख 50,000 नलों पर मीटर लगाए जाने की तैयारियां की जा रही हैं। मीटर खरीदने व लगाने का खर्च नागरिकों से ही वसूले जाने से पहले से ही अनियमित जलापूर्ति का सामना कर रहे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर में 24 घंटे नियमित जलापूर्ति शुरू करने के उद्देश्य से यह अहम फैसला लिया गया है।
हालांकि, नई जलापूर्ति योजना पूरी क्षमता से शुरू होने से पहले ही मीटर लगाने की जल्दबाजी पर नागरिक सवाल उठा रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर शहर के लिए केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 2,740 करोड़ की जलापूर्ति परियोजना मंजूर की गई है। शुरुआत में योजना का लागत खर्च 1,680 करोड़ रुपये था। हालांकि, बाद में लागत बढ़ने के कारण इसे विस्तारित किया गया।
दिसंबर 2020 में भूमिपूजन होने के बावजूद परियोजना के कार्य में देरी हुई। पहले चरण का काम पूरा होने में करीब पांच वर्ष लग गए। अभी तक 200 एमएलडी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होने के बावजूद मीटर लगाने का निर्णय लिए जाने से प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना लाजमी है।
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प्रशासन के प्रारंभिक प्रस्ताव के अनुसार, जिन घरों में मीटर लगाए जाएंगे, उन्हीं को नई योजना के तहत पानी की आपूर्ति की जाएगी, मीटर की आपूर्ति व स्थापना की जिम्मेदारी निविदा के जरिए चुनी गई ठेकेदार कंपनी को दी जाएगी। पुराने आंतरिक पाइपलाइन नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का भी प्रस्ताव है।
नई जलवाहिनी के जरिए जायकवाडी बांध से नक्षत्रवाड़ी जलशुद्धिकरण केंद्र तक जलापूर्ति का परीक्षण अभी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में घर-घर नियमित जलापूर्ति शुरू होने से पहले ही मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज होने से नागरिकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।