

Wardha Water Pipeline Repair Work: वर्धा शहर से सटे 14 गांवों को प्रादेशिक जलापूर्ति योजना के अंतर्गत जलापूर्ति की जाती है। इस योजना का संपूर्ण नियोजन मजीप्रा की ओर से किया जाता है। वर्तमान में सभी गांवों की जलापूर्ति सेवा ठप पड़ी हुई है। इसका मुख्य कारण योजना की मुख्य पाइप लाइन की मरम्मत बताया जा रहा है।
20 फरवरी से युद्धस्तर पर यह कार्य शुरू है और 25 फरवरी तक इसके पूर्ण होने का अनुमान है। ऐसे में 26 फरवरी के बाद ही जलापूर्ति सेवा शुरू होने की संभावना है। पिछले पांच दिनों से नल न आने के कारण क्षेत्र के नागरिक पेयजल के लिए दर-दर भटकते नजर आ रहे हैं। वर्धा शहर व आसपास के 14 गांवों को महाकाली स्थित धाम प्रकल्प से जलापूर्ति की जाती है।
मजीप्रा के माध्यम से प्रादेशिक जलापूर्ति योजना के तहत पिपरी (मेघे) सहित शहर से सटे बोरगांव, सावंगी, सिंदी मेधे, साटोड़ा, नालवाड़ी, म्हसाला, वरुड, वायगांव निपानी, उमरी, दत्तपुर और सालोड गांवों में पानी की आपूर्ति होती है।
इस क्षेत्र में मजीप्रा के लगभग 22 हजार नल कनेक्शन हैं। योजना की 7 किमी लंबी मुख्य पाइ पलाइन जर्जर होने के कारण इसे बदला जा रहा है। दिवाली से पहले साढ़े तीन किमी पाइप लाइन बदली गई थी।
शेष पाइप लाइन बदलने का कार्य 20 से 25 फरवरी के दौरान किया जा रहा है। इसके लिए मजीप्रा ने सभी नल उपभोक्ताओं को पूर्व सूचना भी दी थी। मरम्मत का कार्य तेजी से दिन-रात जारी है। परंतु इस कार्य में देरी होने की भी आशंका व्यक्त होने से और कुछ दिनों तक नागरिकों को त्रासदी उठानी पड़ सकती है।
लगातार पांच दिनों तक नल न आने से नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दो से तीन दिनों तक लोगों ने पानी का संचय कर रखा था। जिनके यहां बोरवेल हैं, उन्हें अधिक समस्या नहीं हो रही है, लेकिन जो परिवार केवल नल के पानी पर निर्भर हैं, वे काफी परेशान हैं।
गांवों में सूखे पड़े बोरवेल और कुओं पर फिर से लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। नागरिकों ने मांग की है कि समय पर कार्य पूर्ण कर जल्द से जल्द राहत प्रदान की जाए।
मजीप्रा से मिली जानकारी के अनुसार 25 फरवरी तक मरम्मत कार्य पूर्ण हो जाएगा, इसके बाद कुछ तकनीकी कार्य किए जाएंगे। पश्चात दो दिन जलापूर्ति का ट्रायल लिया जाएगा, इसके बाद 26 या 27 फरवरी से सभी 14 गांवों में जलापूर्ति सेवा सुचारू रूप से शुरू होने की संभावना है।