Chhatrapati Sambhajinagar BJP Victory Local Body ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar BJP Victory Local Body: छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषद की सत्ता को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच भारतीय जनता पाटी ने सटीक रणनीति अपनाते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर कब्जा जमा लिया। अध्यक्ष पद पर प्रो. अविनाश पाटील गलांडे और उपाध्यक्ष पद पर जितेंद्र (बाबा) जैसवाल का निर्विरोध चयन हुआ।
इस घटनाक्रम को जिले की राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। बुधवार 18 मार्च को जिला कलेक्टर कार्यालय के सभागार में चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।
अपर जिलाधिकारी संभाजी अडकुने की उपस्थिति में पूरी कार्यवाही पूरी की गई। मतदान की नौबत ही नहीं आई, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा। इससे भाजपा को सीधा लाभमिला और दोनों पदों पर निर्विरोध जीत सुनिश्चित हो गई।
चुनाव परिणाम से पहले सत्ता गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। शिवसेना अध्यक्ष पद की मांग कर रही थी, जबकि भाजपा इस पद को अपने पास रखने पर अड़ी थी।
चुनाव के दौरान जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था, बिना पहचान पत्र किसी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। सभी सदस्यों की जांच के बाद ही उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई शिवसेना के रुख को देखते हुए, जो समझौते के लिए तैयार नहीं थी, मतदान से कुछ घंटे पहले ही भाजपा ने रणनीति बदलते हुए पूरा खेल पलट दिया।
शिवसेना को किनारे करते हुए भाजपा ने राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के 4 सदस्यी और निर्दलीयों का समर्थन अपने पक्ष में कर लिया इसके साथ ही बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए महाविकास आघाड़ी के उद्धव ठाकरे गुट के 3, राष्ट्रवादी कसोस (शरद पवार गुट) के 1 और 1 निर्दलीय सदस्य को अपने पक्ष में कर भाजपा ने सीधे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर दावा ठोक दिया।
दोनों शिवसेना गुटों ने मतदान में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया, जिससे किसी भी अन्य उम्मीदवार का नामांकन नहीं हुआ। परिणामस्वरूप दोनों पदों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए। नए समीकरण के अनुसार अब जिला परिषद में भाजपा के समर्थन में कुल 36 सदस्य होने की बात सामने आई है, जो विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
दाई-ढाई वर्ष के फार्मूले पर भी चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। अंततः भाजपा ने अन्य दलों और निर्दलीय सदस्यों का समर्थन जुटाकर बहुमत हासिल कर लिया।
भाजपा ने अंतिम समय में अपनी रणनीति बदलते हुए विपक्षी खेमे में संघ लगाई। कुछ सदस्यों का समर्थन हासिल कर पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, विपक्ष द्वारा मतदान का बहिष्कार किए जाने से भाजपा की राह और आसान हो गई।
राज्यभर में इस चुनाव परिणाम की जोरदार चर्चा हो रही है और इसे शिंदे गुट की शिवसेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद आगे की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। इस परिणाम के बाद जिले में भाजपा का राजनीतिक वर्चस्व और मजबूत हो गया है।
यह भी पढ़ें:-19 मार्च का इतिहास: भारत-बांग्लादेश रिश्तों की नींव, 1972 की ऐतिहासिक मैत्री संधि
साथ ही राज्य स्तर पर भी इस घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की बड़ी रणनीतिक जीत मान रहे हैं। आने वाले समय में इसका असर स्थानीय और राज्य की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।