मनपा चुनाव परिणाम: संभाजीनगर मनपा में भाजपा का ऐतिहासिक बहुमत, MIM बनी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी
Sambhajinagar Election Results: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव में भाजपा ने 58 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। MIM ने 33 सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंकाया, जबकि कांग्रेस सिर्फ एक सीट पर सिमट गई।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
Municipal Corporation Results: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव का अंतिम परिणाम सामने आ गया है, जिसमें भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कुल 115 सीटों वाली मनपा में भाजपा ने 58 सीटें जीतकर मजबूत बढ़त बना ली है। चुनाव नतीजों ने शहर की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं।
अंतिम परिणामों के अनुसार भाजपा के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का रहा, जिसने 33 सीटों पर जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया है। MIM की यह सफलता शहर के कई प्रभागों में उसके मजबूत जनाधार को दर्शाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह परिणाम आगामी चुनावों के लिए भी अहम संकेत माना जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को इस चुनाव में 12 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट को केवल 6 सीटें ही मिल सकीं, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और पार्टी को सिर्फ 1 सीट पर ही जीत मिल पाई। अजित पवार (राकां) का खाता इस चुनाव में नहीं खुल सका, वंचित बहुजन आघाडी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज कर मनपा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
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भाजपा की इस जीत को पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने विकास, बुनियादी सुविधाओं और मजबूत प्रशासन के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिसका सीधा लाभ पार्टी को मिला। वहीं MIM की मजबूत उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर की राजनीति अब बहुकोणीय होती जा रही है।
भाजपा पहली बार बड़े भाई की भूमिका में
भाजपा को चुनाव में सबसे अधिक मत और सीटें मिलने से अब महानगरपालिका पर उसका वर्चस्व तय माना जा रहा है। हालाकि शिंदे सेना महायुति की प्रमुख घटक पार्टी होने के कारण दोनों दलों की संयुक्त सत्ता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, सबसे अधिक सीटें जीतने के कारण भाजपा एक बार फिर ‘बड़े भाई’ की भूमिका में पहली बार मनपा में नजर आएगी। ऐसे में पहली बार भाजपा 5 साल तक अपना ही महापौर रखेगी।
भाजपा व शिंदे सेना के कई दिग्गज उम्मीदवारों ने दर्ज की जीत
इस चुनाव में भाजपा और शिंदे सेना के कई दिग्गज उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जिन पर पूरे शहर की नजरें टिकी हुई थीं, शिवसेना शिंदे गुट से पूर्व महापौर अनिता घोडेले, राजेंद्र जंजाल, राजू वैद्य, हर्षदा शिरसाट और सिद्धांत शिरसाट विजयी रहे। वहीं भाजपा की ओर से प्रमोद राठोड, विजय औताडे, राज गौरव वानखेडे, अनिल मकरिये और माधुरी अदवंत जैसे प्रमुख नेताओं ने सफलता हासिल की।
कड़े मुकाबले के बीच मतदाताओं ने इन नेताओं पर भरोसा जताते हुए उनके राजनीतिक भविष्य को मजबूत किया है। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर की राजनीति में अनुभवी और प्रभावशाली चेहरों की भूमिका अब भी निर्णायक बनी हुई है।
अब सभी की निगाहें महापौर और स्थायी समिति के गठन पर टिकी हैं। स्पष्ट बहुमत के चलते भाजपा का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, MIM के मजबूत विपक्ष की भूमिका भी आगामी कार्यकाल में मनपा की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। इन नतीजों के साथ छत्रपति संभाजीनगर की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो गया है, जहां सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए बड़ी चुनौतियां और अवसर सामने है।
छत्रपति संभाजीनगर मनपाः अंतिम सीटों की स्थिति
- छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव 2026 ने शहर की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।
- कड़े मुकाबले और हाई प्रोफाइल चेहरों की मौजूदगी के बीच हुए इस चुनाव में महानगर की असली ताकत सामने आ गई।
- नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा ने एक बार फिर छत्रपति संभाजीनगर की राजनीति में अपना दबदबा कायम रखते हुए विकास के
- मुद्दे पर जनता का विश्वास जीतने में कामयाब हुई है। जबकि कांग्रेस संघर्षपूर्ण प्रदर्शन के साथ अपनी साख बचाने में असफल हुई है।
‘हिंदुत्ववादी’ पार्टी की हुई अपार जीत
मनपा चुनाव में भाजपा ने हिंदुत्व के मुद्दे को केंद्र में रखकर आक्रामक और प्रभावी प्रचार किया, पार्टी ने यह संदेश मतदाताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया कि किस प्रकार प्रतिद्वंद्वी शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने हिंदुत्व से समझौता किया है।
भाजपा का यह प्रचार मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहा और परिणामस्वरूप मतदाताओं ने भाजपा के पैनल को समर्थन देते हुए हिंदुत्व की विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
शिवसेना शिंदे गुट ने भी हिंदुत्व के मुद्दे को आधार बनाकर मतदाताओं से समर्थन मांगा था। इसका उन्हें भी लाभ मिला और पार्टी को अपेक्षाकृत अच्छा जनसमर्थन हासिल हुआ, कुल मिलाकर चुनावी नतीजों में हिंदुत्व का मुद्दा निर्णायक साबित हुआ, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है।
विकास के लिए जनता ने भाजपा को चुना
भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष किशोर शितोले ने कहा कि मतदाताओं ने शहर के विकास के लिए हमें स्पष्ट बहुमत दिया है। शहर की जनता जान चुकी थी कि शहर का विकास भाजपा ही कर सकती।
जिसके चलते मतदाताओं ने हमे मनपा पर सत्ता तक पहुंचा दिया, शितोले ने शहर वासियों ने आश्वस्त करते हुए कहा कि भाजपा की केंद्र व राज्य में सत्ता है। हमारा महापौर बनने के बाद हमें दोनों सरकारों से अधिक से अधिक निधि लाकर शहर का विकास पर जोर देंगे।
-किशोर शितोले, भाजपा शहराध्यक्ष
हमारी तरह सहयोगी को भी कर रहे खत्म
मनपा चुनाव में उबाता को 6 सीटें मिली और 35 स्थानों पर दूसरे स्थान पर रही। हमने मतदाताओं तक पहुंचकर अच्छा प्रचार किया, परंतु भाजपा ने जमकर धन का इस्तेमाल किया शहरवासियों को पानी मुहैया नहीं कराने के बावजूद भाजपा को विजयी बनाना समझ से परे है। हमारा चुनाव हारना खेदजनक है। जिस तरह भाजपा ने शिवसेना को खत्म किया, उस तरह उनके सहयोगी (शिवसेना) शिंदे गुट को भी खत्म करना अनुचित है।
– अंबादास दानवे (नेता, उबाठा)
जनता ने एमआईएम को जिताया
एमआईएम के वरिष्ठ नेता नासेर सिद्दीकी ने नवभारत से बातचीत करते हुए पार्टी को मिली जीत पर शहर की जनता की आभार मानते हुए कहा कि जनता ने ही एमआईएम को इतने बड़े पैमाने पर जीत दिलाई।
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एमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी तथा अकबरुद्दीन ओवैसी ने शहर में तीन-तीन दौरे कर मतदाताओं को मजलिस को विजयी बनाने की अपील की। उनकी अपील को शहर की जनता ने मानते हुए एमआईएम को इत्तने बड़े पैमाने पर साथ दिया।
-नासेर सिद्दीकी, एमआईएम नेता
