संभाजीनगर मनपा में समितियों गठन ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर महापौर और उपमहापौर के चयन के बाद अब मनपा में स्थायी समिति तथा विभिन्न विषय समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाली विशेष सर्वसाधारण बैठक में इन समितियों के सदस्यों के नामों को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
इसे लेकर मनपा के राजनीतिक गलियारों में गतिविधियां बढ़ गई हैं और इच्छुक नगरसेवक सक्रिय हो गए हैं। महापौर समीर राजूरकर ने जानकारी दी कि फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में विशेष सर्वसाधारण बैठक बुलाई जाएगी।
इसी बैठक में स्थायी समिति के 16 सदस्यों तथा पांच विषय समितियों के सदस्यों के चयन को अनुमोदन प्रदान किया जाएगा, बैठक के दौरान विभिन्न दलों के गुट नेताओं द्वारा बंद लिफाफे में सदस्यों के नाम प्रस्तुत किए जाएंगे, सर्वसाधारण बैठक में इन लिफाफों को खोला जाएगा और महापौर द्वारा चयनित सदस्यों के नामों की घोषणा की जाएगी।
स्थायी समिति के अलावा महिला एवं बाल कल्याण समिति, शिक्षा समिति, स्वास्थ्य समिति, शहर सुधार समिति और समाज कल्याण समिति के सदस्यों का चयन भी इसी विशेष बैठक में किया जाएगा, चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सभी समितियों के निर्वाचित सदस्यों के नामों का पंजीयन विभागीय आयुक्त कार्यालय में कराया जाएगा। महापौर ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया नियमानुसार पारदर्शी तरीके से संपन्न की जाएगी।
महापौर ने स्पष्ट किया कि सभागृह नेता और विरोधी पक्ष नेता के पदों का चयन विशेष सर्वसाधारण बैठक से संबंधित नहीं है। इन पदों पर नियुक्ति संबंधित राजनीतिक दलों की लिखित सिफारिश के आधार पर की जाती है।
इसलिए इन दोनों पदों पर अंतिम निर्णय संबंधित दल ही करेंगे, नगरसेवकों की संख्या के आधार पर स्थायी समिति के सदस्यों का चयन किया जाता है। वर्तमान स्थिति के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के 57 नगरसेवक होने के कारण उसे 8 सदस्य मिलेंगे।
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एमआईएम के 33 नगरसेवक होने से उसे 5 सदस्य मिलेंगे। शिंदे गुट की शिवसेना के 2 सदस्य और शिवसेना उबाठा गुट का 1 सदस्य शामिल होगा। इस प्रकार कुल 16 सदस्यों की स्थायी समिति का गठन किया जाएगा।
स्थायी समिति में स्थान पाने के लिए विभिन्न दलों के नगरसेवक सक्रिय हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी, एमआईएम, शिंदे गुट और उबाठा गुट के कई नगरसेवक सदस्य बनने के लिए प्रयासरत हैं। सभी की निगाहें अपने अपने दलों के शीर्ष नेतृत्व के निर्णय पर टिकी हुई हैं।