मराठवाड़ा के उद्योगों पर संकट, गैस किल्लत से बंद हो सकती हैं फैक्ट्रियां, 600 करोड़ का होगा भारी नुकसान
LPG Shortage: ईंधन की भारी किल्लत और बुनियादी ढांचे की कमी से छत्रपति संभाजीनगर का औद्योगिक क्षेत्र संकट में है। CMIA ने सरकार से कनेक्टिविटी सुधारने और LNG-LPG आपूर्ति बहाल करने की गुहार लगाई है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Industrial Crisis: नया औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी व मजबूत बुनियादी ढांचा जरूरी है। छत्रपति संभाजीनगर व मराठवाड़ा क्षेत्र में औद्योगिक निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं व इसके लिए हवाई, रेल व सड़क संपर्क में व्यापक सुधार की दरकार है।
इसे देखते हुए चेंबर ऑफ मराठवाड़ा इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (CMIA) उद्योग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गत 6 महीनों से सरकार व संबंधित विभागों के साथ संवाद स्थापित कर रहा है। यही नहीं, केंद्र व राज्य सरकार से एलएनजी व एलपीजी की आपूर्ति शीघ्र सामान्य कर स्थिति सुधारने का भी अनुरोध किया गया है। यह जानकारी सीएमआईए केअध्यक्ष उत्सव माच्छर व मानद सचिव मिहीर सौंदलगेकर ने बीते दिन संवाददाताओं से बातचीत में दी। इस दौरान उपाध्यक्ष अथर्वेशराज नंदावत, कोषाध्यक्ष सौरभछल्लाणी, सदस्य ऋषिकेश जाजू, ऋषिकेश गवली, सीए सोहम कोटक, मोदानी, अनिकेत पाटील व रवींद्र मानवतकर उपस्थित थे।
कई बार दिए ज्ञापन
माच्छर ने कहा कि राज्य सरकार के मंत्रियों व संबंधित अधिकारियों के समक्ष नई विमान सेवाओं, एयर कार्गो सेवा की शुरुआत, अधिक शहरों से हवाई संपर्क, मनमाड-छत्रपति संभाजीनगर रेलमार्ग का डबलिंग, पुणे-छत्रपति संभाजीनगर सड़क सुधार, शेंद्रा-बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विकास, मोबाइल नेटवर्क की समस्याएं, औद्योगिक बिजली दरों में वृद्धि जैसे मुद्दे रखे गए हैं।
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शेंद्रा-बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र में सड़कों की बदहाली, मोबाइल नेटवर्क टावरों का चालू न होना, औद्योगिक क्षेत्रों में बार-बार बिजली कटौती, आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास जैसे मुद्दों पर भी सरकार को कई बार ज्ञापन सौंपे हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि मध्य पूर्व की परिस्थितियों के चलते एलएनजी व एलपीजी गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है व इसका असर मराठवाड़ा के उद्योगों पर पड़ रहा है।
उत्पादन शुरू करने लगेंगे लगभग 600 करोड रुपए
कैनपैक इंडिया के सीईओ विक्रम पोतदार ने बताया कि वर्तमान में कंपनी के पास सिर्फ 4 दिनों के लिए पर्याप्त ईंधन का भंडार उपलब्ध है व शीघ्र ही 3-4 टैंकर एलपीजी मिलने की उम्मीद है। यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो उत्पादन इकाइयां बंद करनी पड़ेगी। ऐसे में उत्पादन प्रणाली पुनः शुरू करने के लिए 600 करोड़ रुपये का खर्च संभव है। उत्पादन पूरी तरह से सामान्य होने में 6 महीने लग सकते हैं।
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औद्योगिक उत्पादन व रोजगार पर व्यापक असर संभव
कैनपैक इंडिया के कॉर्पोरेट मामलों के प्रमुख जनार्दन काले ने कहा कि एक बार उत्पादन लाइन बंद होने के बाद भट्टी को पूरी तरह ठंडा होने में एक महीने लगता है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो गंभीर सुरक्षा जोखिम भी उत्पन्न हो सकते है। सीएमआईए ने कहा कि उद्योगों के लिए निरंतर ऊर्जा आपूर्ति बेहद जरूरी है। अन्यथा क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादन व रोजगार पर व्यापक असर संभव है।
