
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Bombay High Court Aurangabad Bench: छत्रपति संभाजीनगर प्राकृतिक आपदा के नाम पर 24 करोड़ 90 लाख रुपए के सरकारी अनुदान गबन मामले में आरोपी 18 सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं बाम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने खारिज कर दीं।
दो दिनों तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने सुरक्षित रखा फैसला सोमवार को सुनाया। जालना जिले की घनसावंगी व अंबड़ तहसीलों में प्राकृतिक आपदा के चलते खेती तबाह होने से सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए अनुदान घोषित किया था।
हालांकि, अनुदान लाभार्थियों की सूची अपलोड करने की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ अधिकारी-कर्मचारियों पर फर्जी नाम शामिल कर उनके नाम पर राशि हड़पने के आरोप सामने आए।
तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति ने 240 गांवों में 24 करोड़ 90 लाख, 77,811 रुपए के गबन की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट सौंपी थी। इस प्रकरण में 22 पटवारी, तहसील कार्यालय के प्राकृतिक आपदा प्रबंधन विभाग के 5 कर्मी व जिलाधिकारी कार्यालय का एक कर्मचारी मिलाकर कुल 28 लोगों के खिलाफ अंबड़ पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
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सोमवार को दिए गए आदेश में गणेश मिसाल, विठ्ठल गाडेकर, सुकन्या गवते, रामेश्वर जाधव, विजय जोगदंड, रमेश कांबले, सूरज बिक्कड़, बाप्पासाहेब भुसारे, कृष्णा मुजगुले, निवास जाधव, विनोद ठाकरे, सुनील सोरमारे, वैभव आड़गांवकर, विजय भांडवले, कैलास घारे, डिगंबर कुरेवाड़, दिनेश बेराड़ व मोहित गोसिक इन 18 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज की गई। राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील अमरजीत सिंह गिरासे, सहायक सरकारी वकील अफताब खान व आरके इंगोले ने पैरवी की।






