लोकतंत्र पर हमला! कैश फॉर वोट सूची से हड़कंप, मनपा चुनाव से पहले बड़ा आरोप; बेगमपुरा में चुनावी तनाव
Election Controversy: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव से पहले बेगमपुरा में कथित कैश फॉर वोट सूची सामने आई। वोट के बदले पैसे बांटने के आरोपों से शहर का चुनावी माहौल गरमा गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Municipal Election Vote Buying: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव से ठीक पहले शहर में कथित ‘कैश फॉर वोट’ मामले ने चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। बेगमपुरा इलाके में वोट के बदले पैसे बांटने से जुड़ी एक कथित सूची सामने आने के बाद शहर में हड़कंप मच गया।
इस सूची को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वायरल हुई सूची में मतदाताओं के नाम दर्ज हैं और आरोप है कि इन्हीं नामों के आधार पर वोट हासिल करने के लिए पैसों का लेनदेन किया जाना था।
नागरिकों का कहना है कि यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह न सिर्फ चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि मतदाताओं की स्वतंत्रता और निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना के भी खिलाफ है।
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सूची सामने आने के बाद बेगमपुरा क्षेत्र में काफी देर तक तनाव का माहौल बना था। कई नागरिकों ने एकत्र होकर विरोध जताया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। लोगों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की गतिविधियां यह दर्शाती हैं।
चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा डगमगाया
कुछ लोग किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना चाहते है। इससे आम मतदाता का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा डगमगाने लगा है। घटना से नाराज नागरिकों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं की जाती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे।
कुछ नागरिकों ने तो मतदान बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। इस चेतावनी ने चुनावी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि मतदान प्रतिशत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन और चुनाव से जुड़े अधिकारियों पर भी दबाव बढ़ गया है। नागरिकों की मांग है कि वायरल सूची की सत्यता की तुरंत जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि इसके पीछे कौन लोग है।
संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग
साथ ही यदि पैसों के लेन-देन की कोशिश की गई है तो संबंधित लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह के आरोप सामने आना बेहद गंभीर संकेत हैं।
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यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंच सकता है। अब सभी की नजर प्रशासन और चुनाव अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है, क्योंकि इसी से यह तय होगा कि चुनाव प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी रह पाएगी।
