अवैध गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट सख्त: 24 घंटे हिरासत में रखना पड़ा महंगा; वकील को 75 हजार मुआवजा देने का आदेश

Bombay High Court: घरेलू हिंसा मामले में वसूली वारंट के आधार पर वकील की अवैध गिरफ्तारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने राज्य को 75 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
High Court Takes Strict Stance on Illegal Arrest: 24-Hour Detention Proves Costly; Order Issued to Pay ₹75,000 Compensation to Lawyer
Aurangabad Bench Illegal Arrest Lawyer ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Aurangabad Bench Illegal Arrest Lawyer: छत्रपति संभाजीनगर घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में वसूली वारंट के आधार पर एक वकील को अवैध रूप से गिरफ्तार कर 24 घंटे तक हिरासत में रखने का मामला बेगमपुरा पुलिस थाने के एक पीएसआई को महंगा पड़ गया।

मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने इस कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए राज्य सरकार को संबंधित वकील को 75 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि संबंधित पुलिस अधिकारी से ही वसूल की है।

जाएगी।

मामले के अनुसार, औरंगाबाद जिला न्यायालय में वकालत करने वाले एड। मुकेश सुरेश प्रसाद के खिलाफ उनकी पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।

PSI की कार्रवाई को अदालत ने बताया अवैध

इस प्रकरण में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 19 हजार रुपये की वसूली के लिए वारंट जारी किया था। 4 अप्रैल 2023 को बेगमपुरा पुलिस थाने के पीएसआई एम. एस. गायकवाड ने इसी वारंट के आधार पर एड. प्रसाद को हिरासत में ले लिया हालांकि वारंट केवल राशि की वसूली के लिए जारी किया गया था, इसके बावजूद पीएसआई ने उन्हें गिरफ्तार कर रातभर पुलिस हिरासत में रखा, इस दौरान उन्हें अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति भी नहीं दी गई।

साथ ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डी. के. बसु मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया। अगले दिन न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए इसके बाद एड. प्रसाद ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर पांच लाख रुपये मुआवजे की मांग की।

मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति संदीप कुमार मोरे और न्यायमूर्ति आबासाहेब शिंदे की खंडपीठ ने पुलिस की कार्रवाई की गैरकानूनी बताते हुए राज्य सरकार को दो महीने के भीतर 75 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया, अदालत ने यह भी कहा कि यह राशि पीएसआई गायकवाड से वसूल की जाए।

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