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छत्रपति संभाजीनगर मनपा: 67 करोड़ के बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट पर हंगामा, जांच पूरी होने तक भुगतान पर लगी रोक

Chhatrapati Sambhajinagar News: छत्रपति संभाजीनगर मनपा के 67 करोड़ के बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट में अनियमितता के आरोपों के बाद स्थायी समिति ने जांच पूरी होने तक ठेकेदार एजेंसी का भुगतान रोक दिया है।

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: May 19, 2026 | 02:10 PM

छत्रपति संभाजीनगर मनपा (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

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Chhatrapati Sambhajinagar Biomining Project Scam News: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के 67 करोड़ रुपये के बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट को लेकर सोमवार को स्थायी समिति की बैठक में जबरदस्त हंगामा हुआ। भाजपा नगरसेवक राज गौरव वानखेड़े इन मुद्दों को उठाते हुए आरोप लगाया कि कचरा निस्तारण का काम अधूरा और निम्न स्तर का होने के बावजूद संबंधित एजेंसी जीएनआई को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।

काम अधूरा, लेकिन 17 करोड़ का बिल तैयार

बैठक में भाजपा सदस्य वानखेडे ने आरोप लगाया गया कि एजेंसी ने तय मानकों के अनुसार काम नहीं किया। बावजूद इसके 17 करोड़ रुपए का बिल तैयार कर भुगतान प्रक्रिया शुरू कर दी गई। राज वानखेड़े ने कहा कि जब काम संतोषजनक नहीं था तो भुगतान की अनुमति किस आधार पर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान सरकारी धन की लूट हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआत में भुगतान मिलने के बाद ही एजेंसी ने मशीनें मौके पर पहुंचाई। उससे पहले केवल कचरे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का काम किया जा

एजेंसी को बचाने का काम कर रहा प्रशासन

वानखेड़े ने प्रशासन और ठेकेदार एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वास्तविक काम कम हुआ। लेकिन कागजों में बड़े पैमाने पर प्रक्रिया दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन एजेंसी को बचाने का काम कर रहा है। बता दे कि 1982 से जमा कचरे को हटाने के लिए यह प्रोजेक्ट शुरु किया गया था। नारेगांव स्थित कचरा डंपिंग ग्राउंड पर वर्ष 1982 से भारी मात्रा में कचरा जमा था।

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छत्रपति संभाजीनगर शहर में लगातार बढ़ती कचरा समस्या के बाद महानगरपालिका ने नारेगाव के साथ विकलथाना, पड़ेगांव और हर्सल क्षेत्रों में बायोमाइनिंग परियोजना शुरू की थी। न्यायालय के निर्देश के बाद लगभग 12 लाख मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की योजना बनाई गई। इसके लिए शासन ने 67 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया था। निविदा के अनुसार करीब 10 लाख मीट्रिक टन कचरे पर प्रक्रिया किया जाना तय था।

CCTV और पीएमसी रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल

प्रशासन के जवाब से सदस्य संतुष्ट नजर नहीं आए। बैठक में पूछा गया कि वास्तव में कितने कचरे पर प्रक्रिया हुई। इसकी निगरानी के लिए सीसीटीवी व्यवस्था थी या नहीं। सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया कि प्रक्रिया किए गए कचरे का सही माप किस आधार पर किया गया। परियोजना प्रबंधन सलाहकार की रिपोर्ट क्या कहती है। इसकी स्पष्ट जानकारी प्रशासन क्यों नहीं दे रहा।

यह भी पढ़ें:- छत्रपति संभाजीनगर मनपा: 1279 करोड़ के टैक्स बकाये पर हंगामा, 15-20 दिन में पानी मिलने तक जल कर वसूली पर रोक

पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर 7 करोड़ रुपए का जुर्माना

बैठक में यह मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा कि बायोमाइनिंग प्रक्रिया के दौरान पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हुआ। जिसके चलते राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका पर 7 करोड रुपये का जुर्माना लगाया है। सदस्यों ने पूछा कि यह जुर्माना आखिर कौन भरेगा। एजेंसी, अधिकारी या महानगरपालिका। हालांकि प्रशासन इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।

बैठक में बढ़ते विवाद और सदस्यों के तीखे विरोध को देखते हुए स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरिये ने मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ आदेश दिया कि जब तक संपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होती। तब तक संबंधित एजेंसी को कोई भी भुगतान न किया जाए। सभापति ने कहा कि यदि परियोजना में अनियमितता पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Amc biomining chhatrapati sambhajinagar project scam probe

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Published On: May 19, 2026 | 02:10 PM

Topics:  

  • Chhatrapati Sambhajinagar
  • Development Project
  • Maharashtra News

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