मानहानि नोटिस से नहीं डरता, कोर्ट जाने की हिम्मत नहीं करेंगे भुमरे, दानवे का पलटवार
Ambadas Danve Statement: अंबादास दानवे ने संदिपान भुमरे गुट की मानहानि नोटिस पर पलटवार करते हुए 1150 करोड़ रुपये के मुद्दे को असली विवाद बताया और कोर्ट जाने की चुनौती दी।
- Written By: आंचल लोखंडे
Rajya Sabha discussion (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Politics News: छत्रपति संभाजीनगर जिले के शिंदे गुट के सांसद संदिपान भुमरे गुट की ओर से भेजी गई मानहानि नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधान परिषद के पूर्व विपक्षी नेता अंबादास दानवे ने दो टूक कहा कि जिनकी प्रतिष्ठा होती है, वही मानहानि का दावा करते हैं। जिनकी प्रतिष्ठा ही नहीं है, वे क्या दावा करेंगे। मैं ऐसे दावों को महत्व नहीं देता।
उन्होंने कहा, “मैं तो मानहानि के मुकदमे का इंतजार कर रहा हूं। वे अदालत तक जाने की हिम्मत नहीं करेंगे।” दानवे ने कहा कि पूरा मामला 1150 करोड़ रुपये के प्रश्न से जुड़ा है। एक चालक इतनी बड़ी आर्थिक हिम्मत नहीं कर सकता। असली मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए नोटिस भेजी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस अपने वकील को सौंप दी गई है और विधि-सम्मत उत्तर दिया जाएगा, लेकिन उनका दावा है कि मामला अदालत तक नहीं पहुंचेगा।
हिबानामा और पुलिस सुरक्षा पर गंभीर आरोप
दानवे ने कहा कि वह कथित हिबानामा सार्वजनिक करेंगे और सामने वाले पक्ष को यह सिद्ध करना होगा कि उसमें उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित लोगों को पुलिस सुरक्षा प्राप्त है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कितने हिबानामे किए गए हैं।
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200 करोड़ के दावे पर उठाए सवाल
दानवे ने कहा कि चालक जावेद के भाई पर धारा 376 का मामला दर्ज है। उसी शिकायत में उसने 200 करोड़ रुपये होने का दावा किया है और कहा है कि कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। दानवे ने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति ऐसा बयान कैसे दे सकता है।
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राज्यसभा मुद्दे पर होली के बाद तस्वीर साफ
राज्यसभा के संदर्भ में दानवे ने कहा कि महाविकास आघाडी में चर्चा जारी है। ऐसी चर्चाएं मीडिया के सामने नहीं होतीं, होली के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। शिवसेना में उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय पार्टी प्रमुख ही लेते हैं।
किसान ई-KYC और अनुदान पर निशाना
किसानों की ई-केवाईसी और लंबित अनुदान के मुद्दे पर दानवे ने कहा कि वर्ष 2022 से हजारों करोड़ रुपये की सहायता रोकी गई है। घोषित पैकेज पूरी तरह वितरित नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर किसानों को दोहरी सहायता दी गई और अब वह वापस मांगी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक गलती है। जिन अधिकारियों से त्रुटि हुई है, उन पर कार्रवाई की जाए और उनके वेतन से वसूली की जाए। किसानों को परेशान करना उचित नहीं है।
