Amravati News: सोयाबीन बीज की बढ़ती कीमतों से किसान चिंतित, घरेलू बीज से होगी बचत
सोयाबीन किसानों के लिए हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण फसल रही है, लेकिन इस साल किसानों को सोयाबीन के लिए हमीभाव न मिलने के कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
सोयाबीन बीज की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई किसानों की चिंता (सौजन्यः सोशल मीडिया)
अमरावती: सोयाबीन किसानों के लिए हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण फसल रही है, लेकिन इस साल किसानों को सोयाबीन के लिए हमीभाव न मिलने के कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अमरावती जिले में बुआई के लिए ज्यादातर किसान घर में तैयार किया गया सोयाबीन बीज ही उपयोग करते हैं, जिसकी कीमत लगभग 40 रुपये प्रति किलो है। जबकि बाजार से कंपनी के तैयार बीज खरीदने पर किसानों को करीब 100 रुपये प्रति किलो तक भुगतान करना पड़ता है, जो उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ता है।
यह भारी कीमतों का अंतर किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। कई किसान इस बढ़े हुए खर्च को वहन नहीं कर पाते, जिससे उनकी फसल उत्पादन क्षमता और आय पर असर पड़ता है। इसलिए, बीज की गुणवत्ता की जांच करते हुए और उचित बीज प्रक्रिया अपनाकर घरेलू बीज को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो किसानों के लिए एक बेहतर और किफायती विकल्प साबित हो रहा है।
घरेलू बीज: किसानों के लिए सस्ता और भरोसेमंद विकल्प
किसानों का मानना है कि घरेलू बीज से उत्पादन लागत में काफी बचत होती है। हालांकि, इसके लिए बीज प्रक्रिया यानी बीज की अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करना और अंकुरण क्षमता की जांच आवश्यक है। यदि सही प्रक्रिया अपनाई जाए तो घरेलू बीज भी बाजार के महंगे बीजों के मुकाबले उतनी ही प्रभावी और टिकाऊ साबित हो सकते हैं। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी राहुल सातपुते ने बताया, “सोयाबीन के घरेलू बीज पर अच्छी तरह से बीज प्रक्रिया करना और उनकी उगने की क्षमता जांचना जरूरी है। इससे किसानों को महंगे बीज लेने की जरूरत नहीं पड़ती और उत्पादन लागत में भी बचत होती है।”
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जिले में बीज की मांग और उपलब्धता
सोयाबीन की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 100 किलो बीज की आवश्यकता होती है। अमरावती जिले के विभिन्न तालुकों में बीज की कुल आवश्यक मात्रा 2,59,442 क्विंटल है, जबकि उपलब्धता फिलहाल 2,41,960 क्विंटल है। जिले के तालुका अनुसार आवश्यक बीज की मात्रा इस प्रकार है:
अमरावती तालुका: 29,900 क्विंटल
भातकुली: 30,100 क्विंटल
नांदगांव खंडेश्वर: 47,000 क्विंटल
चांदूर रेलवे: 24,535 क्विंटल
धामणगाव रेलवे: 21,860 क्विंटल
तिवसा: 19,000 क्विंटल
मोर्शी: 16,550 क्विंटल
वरूड: 2,741 क्विंटल
चांदूर बाजार: 15,500 क्विंटल
अचलपूर: 11,000 क्विंटल
अंजनगाव सुर्जी: 15,300 क्विंटल
दर्यापूर: 13,100 क्विंटल
धारणी: 4,500 क्विंटल
चिखलदरा तालुका: 7,956 क्विंटल
यह आंकड़े बताते हैं कि सोयाबीन के बीज की उपलब्धता आवश्यक मांग के मुकाबले कम है, जिससे किसानों को सही समय पर बीज उपलब्ध कराना एक चुनौती बना हुआ है।
किसानों की चिंताएं और सरकारी पहल
किसानों का कहना है कि कंपनी के महंगे बीज की खरीदारी करना उनके लिए बोझिल है। इस कारण वे घर पर बीज तैयार करते हैं, लेकिन उनकी चिंता बीज की गुणवत्ता और उत्पादकता को लेकर होती है। ऐसे में सरकार और कृषि विभाग द्वारा बीज प्रक्रिया और गुणवत्ता जांच के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही, कृषि विभाग किसानों को घरेलू बीज की गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है। इससे किसानों को बेहतर पैदावार के साथ आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
