Amravati News: चांदूर बाजार तहसील के अंतर्गत निर्माणाधीन राजुरा लघु परियोजना पिछले 13 वर्षों से विवादों के घेरे में है। वर्ष 2013 से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट पुनर्वास और मुआवजे की मांगों को लेकर अब भी अधर में लटका हुआ है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर सांसद बलवंत वानखेड़े ने परियोजना प्रभावित किसानों और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।
बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि राज्य सरकार द्वारा 2013 से अब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। लघु प्रकल्प संघर्ष समिति के बैनर तले किसान पिछले कई वर्षों से आंदोलन और आमरण अनशन कर रहे हैं, जिसके कारण पिछले दो वर्षों से परियोजना का काम पूरी तरह बंद पड़ा है।
हाल ही में 27 मार्च को सरपंच राहुल वाटाने के नेतृत्व में किसानों ने रिद्धपुर में गेट निर्माण कार्य को बंद करने की चेतावनी दी थी, जहां पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। बैठक में उपस्थित जल संसाधन विभाग की कार्यकारी अभियंता अश्विनी राउत ने बताया कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 173 किसानों को मुआवजे के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
विभागीय आयुक्त की ओर से पुनर्वास का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। विभाग लगातार शासन के साथ पत्र व्यवहार कर रहा है ताकि इस मसले को जल्द सुलझाया जा सके। अधिकारियों की समझाइश के बावजूद प्रकल्प ग्रस्त किसान अपनी मांग पर अडिग रहे।
उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक पुनर्वास का मुद्दा पूरी तरह हल नहीं होता, तब तक परियोजना का निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। सांसद वानखेड़े ने भी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर चर्चा कर किसानों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।
विवाद को सुलझाने के लिए 1 अप्रैल को चांदूर बाजार तहसील कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें उपविभागीय अधिकारी बलवंत अरखराव और मोर्शी के तहसीलदार सहित राजस्व विभाग के अधिकारी संघर्ष समिति के किसानों के साथ चर्चा की।
अश्विनी राउत, कार्यकारी अभियंता, जल संसाधन विभाग, अमरावती ने कहा कि पुनर्वास के लिए राज्य सरकार से लगातार संपर्क किया जा रहा है। मुंबई में अधिवेशन के दौरान भी इस पर चर्चा हुई है। मेरी किसानों से विनती है कि वे निर्माण कार्य न रोकें, क्योंकि काम रोकना समाधान नहीं है।