Amravati Forest Department News: मोर्शी तहसील के हिवरखेड़ परिसर में वन्यजीवों के बढ़ते उपद्रव से किसान लंबे समय से परेशान हैं। नीलगाय, रोही, हिरन, बारहसिंगा, जंगली सूअर, सांभर और बंदरों के झुंड खेतों में घुसकर संतरा, कपास, गेहूं और तुअर जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्र में संतरा मुख्य फसल है, लेकिन नीलगाय और रोही के झुंड संतरे के पेड़ों को काट देते हैं और फल खा जाते हैं। साथ ही अन्य फसलों को पैरों से कुचलकर बर्बाद कर देते हैं। छोटे पौधों और कलमों को भी जंगली जानवर नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे पेड़ों का विकास रुक जाता है। एक संतरे का पेड़ तैयार करने में पांच से सात साल का समय और लगातार देखभाल लगती है, लेकिन वन्यजीवों के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
किसानों का कहना है कि पहले ही उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है और खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वन्यजीवों के कारण हो रहे नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। साथ ही लगातार हो रहे नुकसान से मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। मुआवजे की जटिल प्रक्रिया, कागजी अड़चनों और कम सहायता के कारण कई किसान शिकायत दर्ज कराने से भी बच रहे हैं।
किसानों ने वन विभाग से सोलर ऊर्जा आधारित सुरक्षा बाड़ (कुंपन) योजना को तत्काल लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वे कर समय रहते बाड़ लगाई जाए, तो जंगली जानवरों को खेतों में प्रवेश करने से रोका जा सकता है और नुकसान काफी हद तक कम हो सकता है।
हिवरखेड़ के किसान संदीप काले ने बताया कि उनके खेत में संतरे के छोटे पौधे हैं, जबकि समीप के किसान गोपाल नेहारे के खेत में तुअर की पूरी फसल वन्यजीवों ने नष्ट कर दी। वर्षों से हो रहे नुकसान के बावजूद अब तक ठोस समाधान नहीं मिला है। उन्होंने शासन से शीघ्र नुकसान भरपाई देने की मांग की है।
इस मुद्दे को लेकर विधायक उमेश यावलकर ने विधानसभा में प्रश्न उठाया था। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए दिए गए सुझावों को लागू करने की भी उन्होंने मांग की है।