बुद्ध पूर्णिमा पर वन्यजीवों की गणना, मेलघाट में 261 मचान तैयार, वनविभाग की तैयारियां पूर्ण
Melghat Tiger Reserve: बुद्ध पूर्णिमा पर मेलघाट टाइगर रिजर्व और अमरावती वन क्षेत्र में मचान पर रात बिताने का अनोखा अवसर मिलेगा। 3500-4000 रुपये शुल्क के साथ विशेष जंगल सफारी का अनुभव मिलेगा।
- Written By: आंचल लोखंडे
Melghat Tiger Reserve (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Amravati Forest Tourism: प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव उत्साही लोगों के लिए 1 मई बुद्ध पूर्णिमा की रात एक सुनहरा अवसर लेकर आई है।मेलघाट टाइगर रिजर्व और अमरावती वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने पर्यटकों के लिए मचान पर रात बिताने और जंगल का अनुभव लेने की विशेष व्यवस्था की इस रोमांचक अनुभव के लिए मेलघाट में 261 मचानें तैयार की गई हैं, जबकि अमरावती वन क्षेत्र में भी कई स्थानों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह मचानें मेलघाट टाइगर रिजर्व के सिपना, गुगामल, अकोट और मेलघाट वन्यजीव प्रभाग, पांढरकवाड़ा वन्यजीव प्रभाग के टिपेश्वर और पैनगंगा और अकोला वन्यजीव प्रभाग के ज्ञानगंगा, काटेपूर्णा और कारंजा सोहोल, वनपरिक्षेत्र में बनाई गई है।
परतवाडा दशकों से यह परंपरा रही है कि बुद्ध पूर्णिमा की चांदनी रात में वन्यजीव प्रेमी मचानों पर बैठकर पानी के स्रोतों (वॉटर होल्स) पर आने वाले जानवरों की गिनती करते थे। हालांकि अब तकनीक के दौर में वन विभाग वन्यजीवों की सटीक गणना के लिए ट्रैप कैमरों का उपयोग करता है। इसके बावजूद पर्यटकों के बीच जंगल की शांति और चांदनी रात में जानवरों को देखने का क्रेज कम नहीं हुआ है, जिसे देखते हुए विभाग अब इसे एक विशेष पर्यटन अनुभव के रूप में आयोजित करता है।
वन विभाग की तैयारी और सुरक्षा
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पर्यटकों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। मचानों को ऐसी जगहों पर बनाया गया है जहां से पानी के स्रोत स्पष्ट दिखाई दें, ताकि पर्यटक बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य वन्यजीवों को देख सकें। वन रक्षकों की टीमें रात भर गश्त पर रहेंगी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और जंगल के नियमों का उल्लंघन न किया जाए।
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मचान बुकिंग और शुल्क
इस वर्ष इन मचानों पर रात बिताने के लिए पर्यटकों को विशेष शुल्क अदा करना होगा। वन विभाग के अनुसार मचान बुक करने के लिए पर्यटकों को 3500 रुपये से लेकर 4000 रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है। बुकिंग में आमतौर पर गाइड, सुरक्षा और व्यवस्था शामिल होती है। मचानों की संख्या सीमित होने के कारण पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बुकिंग की गई है।
