

Tembhusonda Primary Health Centre: अमरावती जिले के परतवाड़ा से मात्र बीस किमी दूरी पर स्थित मेलघाट आदिवासी अंचल के टेम्बूसोंडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उसके अधीन उपकेन्द्रों के अंतर्गत विगत दो वर्ष में 71 मासूम शिशुओं की मौत होने की जानकारी मिली है। एक जिम्मेदार नागरिक ने सूचना के अधिकार तहत यह जानकारी प्राप्त की है।
इससे पता चलता है कि मेलघाट में आज भी मासूम बालकों की मृत्यु का सिलसिला जारी ही है। बालकों की इन अकाल मृत्यु को सिर्फ आंकड़ों की नजर से तौलना ठीक नहीं होगा। प्रत्येक बाल मृत्यु के पीछे एक परिवार भी मानसिक शारीरिक रूप से नष्ट हुआ है।
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मेलघाट से कुपोषण का निर्मूलन करने के लिए करोड़ों रुपए का फंड दिया जा रहा है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग को हर संभव सुविधाएं दिए जाने के बाद भी यंत्रणा की नाकामी समझ से परे है।
टेम्बूसोंडा प्राथमिक केंद्र अंतर्गत अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 36 बाल मृत्यु, अप्रैल 25 से मार्च 26 के बीच 29 बाल मृत्यु और अप्रैल 26 से जुलाई 26 के दरमियान 6 बालकों की अकाल मृत्यु हो गई। दो वर्ष में 71 मासूमों को मौत लील गई। उल्लेखनीय है कि टेम्ब्रूसोंडा स्वास्थ्य केंद्र पर बड़ी संख्या में प्रसूति के लिए महिलाएं आती है। वर्ष अप्रैल 24 से मार्च 25 में 3080 महिलाओं की प्रसूति की गई। अप्रैल 25 से मार्च 26 के बीच 338 और अप्रैल से जुलाई 26 के बीच 81 महिलाओं की डिलीवरी की गई थी।
मेलघाट अंचल में जच्चा-बच्चा की मृत्यु के समाचार समय-समय पर सामने आते रहते हैं। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आदिवासी क्षेत्रों में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य के लिए विभिन्न योजनाओं, दवाओं, जांच शिविरों और रुग्णवाहिका जैसी सुविधाओं का दावा किया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत बाल मृत्यु में कमी लाने के लिए बाल मृत्यु पुनरावलोकन सहित कई योजनाएं भी संचालित हैं। टेम्ब्रूसोंडा परिसर के मृत्यु आंकड़ों से योजनाओं और उनके प्रत्यक्ष परिणामों के बीच अंतर दिखाई देता है।
मेलघाट की दुर्गम भौगोलिक स्थिति, कुपोषण, स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने में लगने वाला समय और समय पर उपचार नहीं मिलना जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। पूर्व रिपोर्टों में भी मनुष्यबल, विशेषज्ञ चिकित्सकों और समय पर परिवहन की कमी का मुद्दा उठाया गया था। प्रत्येक बाल मृत्यु के पीछे केवल मेडिकल रीजन दर्ज कर फाइल बंद करने के बजाय मृत्यु के कारण, उपचार में लगा समय, प्राथमिक स्तर पर हुई त्रुटियों और प्रतिबंधात्मक उपायों की विफलता की जांच कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
टेम्बूसोंडा स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में दो वर्षों में 71 बालकों की मृत्यु स्वास्थ्य यंत्रणा पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने मौतों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। इसमें मृत्यु के कारण, कुपोषण, उपचार में देरी, रेफरल व्यवस्था, रुग्णवाहिका और स्वास्थ्य कर्मचारियों की जवाबदारी की जांच की मांग की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान में बाल स्वास्थ्य पर जोर दिए जाने के बावजूद हुई इन मौतों की विस्तृत जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है।
चिखलदरा तहसील वैद्यकीय अधिकारी डॉ. अभिषेक नायडू ने कहा कि हाल ही में मैंने तहसील वैद्यकीय अधिकारी का पदभार संभाला है। संबंधित बालमृत्यु मेरी नियुक्ति के पहले की होने से संबंधित घटनाओं की कोई ठोस वजह मुझे मालूम नहीं है। लेकिन मेलघाट के जिस भी स्वास्थ्य केंद्र में बालमृत्यु की संख्या ज्यादा होने की जानकारी मिलेंगी, ऐसे सभी केंद्रों की वस्तुस्थिति, बालक की मौत की वजह और स्वास्थ्य सेवा में त्रुटि की संपूर्ण जानकारी ली जाएंगी। बाल मृत्यु की रोकथाम हेतु हर संभव उपाय तत्काल किए जाएंगे।