मंजूरी के इंतजार में लटका चिखलदरा का स्काईवॉक, विकास की बातें हवा-हवाई, इको सेंसेटिव जोन की अड़चन

Chikhaldara Skywalk: विदर्भ के प्रमुख पर्यटन स्थल चिखलदरा की विकास योजना 2008 से लंबित है। 2023 में पुणे टाउन प्लानिंग विभाग को भेजी गई योजना को अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
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चिखलदरा स्काईवॉक(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chikhaldara Development Plan: विदर्भ की शान और प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल चिखलदरा आज भी विकास की राह देख रहा है। पर्यटकों को आकर्षित करने वाली प्राकृतिक संपदा, ठंडा मौसम और मनमोहक पहाड़ियां होने के बावजूद यहां की विकास योजनाएं वर्षों से सरकारी नियमों और मंजूरियों के चक्रव्यूह में अटकी हुई हैं।

हालात यह हैं कि वर्षों से प्रस्तावित स्काईवॉक भी जमीन पर उतरने के बजाय हवा में ही लटका हुआ है। दूसरी ओर विकास की योजनाओं को लेकर घोषणाएं और आश्वासन भी अब हवा-हवाई साबित होते नजर आ रहे हैं।

2008 से विकास योजना का इंतजार

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008 से सिडको व्दारा चिखलदरा के विकास के लिए व्यापक विकास योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू है। वर्ष 2019 में विकास योजना को अंतिम रूप देकर वर्ष 2023 में नगर नियोजन विभाग, पुणे को मंजूरी के लिए भेजे जाने की बात सामने आती है। इसके बावजूद 2026 तक इस पर अपेक्षित निर्णय नहीं हो सका है। यही देरी अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।

इको सेंसेटिव जोन बना बड़ी अड़चन

चिखलदरा की प्रस्तावित विकास योजना में शामिल पांच गांव वर्ष 2016 से इको सेंसेटिव जोन के दायरे में हैं। चिखलदरा, शाहपुर, लवादा, आलाडोह तथा आधा मोथा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के नियम लागू होने से निर्माण और विकास कार्यों पर कई पाबंदियां हैं। किसी भी बड़े कार्य से पहले पर्यावरणीय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

विकास और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी

पर्यावरणीय नियमों के कारण चिखलदरा की विकास योजनाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाना चुनौती है। स्काईवॉक जैसी परियोजनाएं वर्षों से लंबित होने से स्थानीय युवाओं और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में चिंता है।

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प्रावधानों को ध्यान में रखना अनिवार्य

गाविलगढ़-चिखलदरा के उपवन संरक्षक वन्यजीव विभाग अनंता डिगोड़े ने कहा कि चिखलदरा, शाहपुर, लवादा, मोथा और आलाडोह गांव पर्यावरण इन संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत इको सेंसेटिव जोन में आते हैं। क्षेत्रों में पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है, किसी भी विकास योजना को आगे बढ़ाते समय इको सेंसेटिव जोन से संबंधित प्रावधानों को ध्यान में रखना अनिवार्य है।

पुणे प्रशासन के संपर्क में

सिडको के मुख्य व्यवस्थापक अक्षय महल्ले ने कहा कि सिड़को ने चिखलदरा के 5 गांवों का विकास नक्शा 2023 में ही टाउन प्लानिंग, पुणे को सौंप दिया था। वहां से तकनीकी प्रक्रिया और अंतिम मंजूरी न मिलने के कारण यह अभी तक लंबित है। हम जल्द से जल्द स्वीकृति प्राप्त करने के लिए लगातार पुणे प्रशासन के संपर्क में हैं।

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