अमरावती में अल नीनो का असर बढ़ा सकता है किसानों की चिंता, प्रशासन ने दी सावधानी बरतने की सलाह
El Nino Impact on Amravati: अल नीनो व मौसम चक्र में बदलाव को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को खरीफ बुआई में जल्दबाजी न करने, कम पानी वाली फसलें चुनने और ड्रिप सिंचाई अपनाने की सलाह दी है।
- Written By: केतकी मोडक
किसान प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Amravati Farmer Advisory: जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा के बीच “अल नीनो” एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रभाव से इस वर्ष मानसून की रफ्तार प्रभावित हो सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी होने की आशंका है। जिला प्रशासन ने किसानों से मौसम और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही खेती संबंधी निर्णय लेने की अपील की है।
क्या है अल नीनो ?
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण उत्पन्न होने वाली वैश्विक जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम चक्र पर पड़ता है। भारत में भी अल नीनो का सीधा प्रभाव मानसून की सक्रियता और वर्षा की मात्रा पर देखा जाता है।
पहले भी दिख चुका है असर वर्ष 1982, 1987, 2002, 2009 और 2015 में अल नीनो के प्रभाव के दौरान देश के कई हिस्सों में कम वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियां देखने को मिली थीं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार भी कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी और कुछ स्थानों पर अतिवृष्टि की स्थिति बन सकती है।
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सरकार ने बढ़ाई तैयारी
महाराष्ट्र सरकार ने जलसंधारण, सूक्ष्म सिंचन, फसल बीमा और मौसम आधारित कृषि सलाह जैसी योजनाओं पर विशेष जोर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों से अपील की है कि वे बुवाई में जल्दबाजी न करें और केवल कृषि तथा मौसम विभाग के अधिकृत मार्गदर्शन के अनुसार ही निर्णय लें।
- प्रमुख जोखिम कम वर्षा/अतिवृष्टि
- प्रभावित वर्ष 1982, 1987, 2002, 2009, 2015
- सिंचाई विकल्प: ड्रिप, संप्रकलर
- सरकारी फोकस: जलसंधारण, फसल बीमा
- लाभकारी उपाय जल संरक्षण
- मुख्य संदेश: वैज्ञानिक खेती अपनाएं
किसानों के लिए विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बिना आधिकारिक सलाह के जल्दबाजी में बुवाई नहीं करने की सलाह दी है। कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का चयन, जल संरक्षण, द्विप और संप्रिंकलर सिंचाई का उपयोग तथा फसल बीमा कराने पर जोर दिया गया है। पशुपालकों को भी चारे और पानी की उपलब्धता के लिए पूर्व नियोजन करने की सलाह दी गई है।
वैज्ञानिक खेती ही समाधान विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक नियोजन, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से अल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर सही निर्णय, मौसम की जानकारी और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किसानों को संभावित नुकसान से बचा सकता है।
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इन राज्यों पर अधिक खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य अल नीनो के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों में वर्षा का असंतुलन कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए किसानों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।
