World Milk Day Special: 10 हजार भैंसों वाला दिवानखेड गांव, तीन पीढ़ियों से चल रहा दुग्ध व्यवसाय
World Milk Day: विश्व दुग्ध दिवस पर अमरावती के दिवानखेड गांव ने दुग्ध उत्पादन में अपनी अनूठी पहचान बनाई है, जहां रोजाना 10,000 लीटर दूध का उत्पादन कर ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की जा रही है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Amravati Milk Village Story: विश्व दुग्ध दिवस के विशेष अवसर पर तिवसा तहसील का दिवानखेड गांव दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का एक अनोखा और प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है। अमरावती शहर से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस प्रगतिशील गांव की मुख्य पहचान ही अब दुग्ध व्यवसाय से बन चुकी है। लगभग 2,500 की कुल आबादी वाले इस छोटे से गांव में वर्तमान में 10 हजार से भी अधिक भैंसें मौजूद हैं और यहां के अधिकांश परिवारों की दैनिक आजीविका पूरी तरह से दूध उत्पादन पर ही निर्भर है।
अमरावती-मार्डी मार्ग पर बसे गांव में गवली समाज का दबदबा
भौगोलिक दृष्टि से अमरावती-मार्डी मार्ग पर बसे इस दुग्ध उत्पादक गांव में करीब 200 परिवार स्थायी रूप से निवास करते हैं। इन परिवारों में से लगभग 90 प्रतिशत परिवार गवली समाज से संबंधित हैं, जिनका मुख्य पेशा ही पशुपालन है। गांव के लगभग अधिकांश घरों में बड़े पैमाने पर भैंस पालन किया जाता है। यहां कई सामान्य परिवारों के पास जहां 15 से 20 भैंसें हैं, वहीं कुछ संपन्न परिवार 35 से 40 भैंसों का व्यावसायिक पालन करते हैं। ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गांव के कुछ बड़े परिवारों के पास तो लगभग 50 भैंसें भी उपलब्ध हैं।
खेती और जैविक खाद (गोबर) बने आय का अतिरिक्त स्रोत
दिवानखेड में इस मुख्य दुग्ध व्यवसाय के साथ-साथ पारंपरिक खेती भी यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अन्य महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है। बाजार में पशु चारे की लगातार बढ़ती लागत के कारण कृषि कार्य इन ग्रामीणों के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो रहा है। इसके साथ ही, पशुपालन से बड़ी मात्रा में तैयार होने वाला गोबर खाद भी यहां के पशुपालकों के लिए आय का एक बेहतरीन अतिरिक्त स्रोत बनकर उभरा है।
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स्थानीय स्तर के साथ-साथ अन्य बाहरी क्षेत्रों के जरूरतमंद किसान भी बड़ी संख्या में यहां आकर जैविक खाद खरीदते हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि संगठित दुग्ध व्यवसाय ने पूरे गांव को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत और सक्षम बनाया है। यही मुख्य कारण है कि दिवानखेड आज समूचे अमरावती जिले में ‘मिल्क विलेज’ के रूप में अपनी एक अलग और प्रतिष्ठित पहचान बनाए हुए है।
तीन से चार पीढ़ियों से साइकिल से मोटरसाइकिल तक का सफर
दिवानखेड गांव में सुबह और शाम दोनों समय मिलाकर प्रतिदिन लगभग 10 हजार लीटर ताजे दूध का भारी उत्पादन होता है। यहां उत्पादित होने वाला यह शुद्ध दूध प्रतिदिन सुबह-शाम अमरावती शहर की विभिन्न बड़ी डेयरियों, प्रतिष्ठित होटलों और सीधे आम ग्राहकों के घरों तक पहुंचाया जाता है। बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि उनके परिवार पिछले तीन से चार पीढ़ियों से इसी गौरवशाली दुग्ध व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।
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पुराने समय को याद करते हुए वे बताते हैं कि पहले के दौर में दूध को साइकिलों के माध्यम से घर-घर जाकर पहुंचाया जाता था, जबकि आधुनिक दौर में अब तेज रफ्तार मोटरसािकिलों और अन्य वाहनों के माध्यम से दूध की सुचारू आपूर्ति की जाती है। इस व्यवसाय ने गांव के युवाओं को भी स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के बड़े अवसर प्रदान किए हैं।
