Dhamangaon Railway News: लकड़ी काटने वालों के आए अच्छे दिन चूल्हों की वापसी से मजदूरों के फिर आए अच्छे दिन। गैस की कमी से बढ़ी मांगधामणगांव रेलवे सं। बदलते समय के साथ जहां ग्रामीण इलाकों में भी चूल्हे की जगह गैस चूल्हों ने ले ली थी, वहीं अब गैस की कमी ने एक बार फिर पुराने दिनों की याद दिला दी है। पहले गांवों में अधिकांश लोग लकड़ी के चूल्हों पर ही खाना बनाते थे, लेकिन विज्ञान और आधुनिकता के प्रभाव से धीरे-धीरे हर घर में गैस का उपयोग शुरू हो गया।
गैस के बढ़ते उपयोग के कारण लकड़ी काटने और फोड़ने वाले मजदूरों की मांग कम हो गई थी। केवल शादी-ब्याह या विशेष कार्यक्रमों में ही उनकी जरूरत पड़ती थी, जिससे उनकी आजीविका पर भी असर पड़ा। कई लोगों ने मजबूरी में अन्य काम अपनाकर अपना गुजारा करना शुरू कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस की उपलब्धता में कमी आने के कारण हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग फिर से लकड़ी के सहारे खाना बनाने को मजबूर हो रहे हैं। खासतौर पर शादी और जयंती जैसे बड़े आयोजनों में सामूहिक भोजन के लिए लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ी है। इस बदलती परिस्थिति ने लकड़ी काटने वालों के लिए नए अवसर पैदा कर दिए हैं। जो औजार पहले बेकार पड़े थे, वे अब फिर से इस्तेमाल में आ रहे हैं। गांव-गांव में लोग अपने घरों के लिए लकड़ी कटवाने लगे हैं।
वालकेकावली गांव के लकड़ी काटने वाले अवधूतराव वालके बताते हैं कि पहले काम मिलना मुश्किल हो गया था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। मुस्कुराते हुए वे कहते हैं, अब तो हमारे भी अच्छे दिन आ गए हैं। गैस की कमी ने जहां आम लोगों की परेशानी बढ़ाई है, वहीं लकड़ी पर निर्भर कामगारों के लिए यह समय राहत और रोजगार लेकर आया है।