बेनोडा स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मचारियों के रिक्त पद भरने की मांग, नागरिकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
Health Services Crisis: वरुड तहसील स्थित बेनोडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मचारियों के रिक्त पदों, दवाइयों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर नागरिकों में नाराजगी है।
Rural Health Issues (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Benoda PHC Issues: वरुड तहसील के बेनोडा श। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों सहित कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर नागरिकों में भारी आक्रोश है। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबीटकर, पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, जिलाधिकारी, जिला शल्य चिकित्सक और जिप जिला स्वास्थ्य अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। जल्द ही मांग पूरी नहीं हुई तो नागरिकों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
वॉटर फिल्टर लंबे समय से बंद
ज्ञापन में आरोप लगाया कि स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी महिला चिकित्सा अधिकारी मरीजों के साथ अपमानजनक व्यवहार करती हैं, इसलिए उन्हें तुरंत स्थायी रूप से सेवा से हटाया जाए। इसके अलावा, स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। वॉटर फिल्टर लंबे समय से बंद पड़ा है, जिससे मरीजों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है। शौचालयों, बाथरूमों और पूरे अस्पताल परिसर सहित जांच विभागों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।
चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं से नाराज ग्रामीण
एंबुलेंस गाड़ी को सुरक्षित खड़ा करने के लिए शेड की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में विभिन्न बीमारियों के लिए आवश्यक दवाइयों की भारी किल्लत है। स्वास्थ्य केंद्र की वर्तमान में नियमित चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध न होने के कारण दोपहर 12 बजे के बाद नए मरीजों का पंजीकरण और जांच बंद कर दी जाती है। जांच का समय केवल सुबह 10 से 12 बजे तक ही रहता है। नागरिकों ने मरीजों की सुविधा के लिए जांच का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक करने की मांग की।
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एक माह में सुधार नहीं तो आंदोलन
नियमित और सही इलाज न मिलने के कारण बेनोडा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के गरीब, किसान, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और छात्रों को इलाज के लिए शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे उन्हें अतिरिक्त यात्रा, आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। नागरिकों ने इस पूरे मामले की जांच कर एक महीने के भीतर सभी समस्याओं का समाधान किया जाए और संबंधित लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो बेनोडा और क्षेत्र के नागरिकों द्वारा तीव्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
