अमरावती के वरुड में जल संकट, संतरे के बगीचे सूखने की कगार पर; किसान परेशान

Warud Morshi Water Shortage: अमरावती के वरुड-मोर्शी क्षेत्र में भूजल स्तर गिरने से संतरा बागानों पर संकट गहराया है। कुएं-बोरवेल से सिंचाई का समय घटकर एक घंटे रह गया है।
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संतरा फसल पर सूखे का संकट(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • अमरावती जिले की वरुड तहसील में बारिश की कमी और भूजल स्तर गिरने से संतरा उत्पादक किसान परेशान हैं।

  • किसानों के अनुसार, जिन कुओं और बोरवेल से पहले दिनभर सिंचाई होती थी, उनसे अब लगभग एक घंटे ही पानी मिल पा रहा है।

  • स्थानीय सिंचाई परियोजनाओं में केवल 30 से 40 प्रतिशत जलसंग्रह शेष रहने की जानकारी दी गई है।

Orange Farmers Amravati: गत 20-25 वर्षों से लगातार कम हो रही बारिश के कारण वरुड तहसील खरीफ फसलों के साथ-साथ प्रसिद्ध संतरा की फसल गंभीर संकट में आ गई है। स्थिति इतनी विकराल हो गई है कि जिन कुओं और बोरवेल से दिनभर सिंचाई पंप चलते थे, उनकी क्षमता घटकर अब केवल एक घंटे पर आ गई है। भूजल स्तर नीचे जाने से कुएं और बोरवेल हांफने लगे हैं तथा उनके तल खुले हो गए हैं, जिससे संतरा उत्पादक किसान पूरी तरह बेहाल हुए हैं।

संतरा पेड़ तोड़ रहे दम, फल फेंकने को मजबूर किसान

वरुड तहसील ने संतरे के दम पर वैश्विक स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इस क्षेत्र में कुल 31 हजार 271 हेक्टेयर कृषि भूमि पर संतरा मोसंबी के बगीचे हैं, जबकि 20 हजार 566 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास, तुअर, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलें तथा 577 हेक्टेयर में मौसमी बागायत फसलें ली जाती हैं। लेकिन इस वर्ष मृग नक्षत्र के दगा देने और बारिश की भारी कमी के कारण नदी-नाले सूखे पड़े हैं, जिससे भूजल स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ। वर्तमान में स्थानीय सिंचाई परियोजनाओं में केवल 30 से 40 प्रतिशत ही जलसंग्रह बचा है।

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पहले से ही 'ड्रायजोन' घोषित है वरुड तहसील

वरुड-मोशी का यह पट्टा संतरा बाहुल्य क्षेत्र है, जिसे प्रशासन द्वारा पहले ही ड्राजोन घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2000 के बाद से भूजल अतिशोषण के चलते यहां भूजल स्तर 1,000 फीट तक नीचे चला गया है। भूजल सर्वेक्षण विभाग द्वारा वरुड और मोर्शी तहसील को अतिशोषित घोषित किए जाने के कारण इस क्षेत्र में नए कुएं खोदने और बोरवेल बनाने पर पाबंदी है, बीच के दिनों में कुछ अच्छी बारिश होने के बावजूद भूजल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।

ड्रिप तकनीक अपनाएं

वरुड तहसील के कृषि अधिकारी रेहान मुजावर ने कहा कि पानी की एक-एक बूंद बचाने के इस अकाल परिस्थिति में उपलब्ध लिए कृषि विभाग द्वारा ड्रिप और सप्रिंकलर सिंचाई के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। सभी किसानों ने कठिन दौर में मल्चिंग और ड्रिप तकनीक अपनानी चाहिए।

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बोरवेल की गहराई पर मिले अनुमति

राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ विदर्भ उपाध्यक्ष प्रवीण वानखड़े ने कहा कि प्रशासन को 800 से 1,000 फीट की गहराई तक बोरवेल खोदने की सशर्त अनुमति देनी चाहिए, ताकि आवश्यकतानुसार किसान पानी का उपयोग कर सके, संतरा बगीचों का हमने छोटे बच्चों की तरह पालनपोषण किया है,

भविष्य को लेकर गहरी चिंता

किसान व पूर्व उपसरपंच किशोर धनोडे ने कहा कि संतरा के मृग बहार के लिए मार्च-अप्रैल तक पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है, ऐसे में वरुड-मोर्शी के संतरा उत्पादको का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। शासन को समय रहते ठोस उपाय करते हुए किसानों को आर्थिक मदद और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना चाहिए।

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