Amravati News: नांदगांवपेठ में 140 एकड़ में बनेगा आईटी पार्क, किरण पातुरकर ने दी जानकारी
Amravati IT Park: अमरावती के नांदगांवपेठ एमआईडीसी क्षेत्र में 140 एकड़ में आईटी पार्क बनाने की मुख्यमंत्री की घोषणा से विदर्भ के युवाओं के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Vidarbha employment news (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nandgaonpeth MIDC IT Park: वर्षों से लंबित अमरावती में आईटी पार्क की स्थापना की मांग अब साकार होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदगांवपेठ एमआईडीसी क्षेत्र में 140 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय आईटी पार्क विकसित किए जाने की घोषणा की है। यह दिन अमरावती, संपूर्ण विदर्भ और विशेष रूप से यहां के युवाओं के लिए ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार की इस आधिकारिक घोषणा के साथ यह सपना अब कागज़ से निकलकर जमीन पर उतरने की दिशा में बढ़ चुका है।
यह कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि पिछले तीन वर्षों से चले निरंतर प्रयास, लोकतांत्रिक संघर्ष और अमरावती के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया ठोस कदम है। यह जानकारी शनिवार को आयोजित पत्रवार्ता में आईटी पार्क कृती समिति के किरण पातुरकर सहित अन्य पदाधिकारियों ने दी।
लगातार कार्यक्रम, बैठकें और चर्चा सत्र आयोजित
उन्होंने बताया कि अमरावती में आईटी पार्क की स्थापना के लिए गठित कृती समिति ने सिर्फ ज्ञापन देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि लगातार कार्यक्रम, बैठकें और चर्चा सत्र आयोजित किए।
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समिति ने जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत और शिक्षा विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात कर अमरावती का मुद्दा मजबूती से रखा। “विदर्भ विकास” को केवल भाषणों तक सीमित न रखते हुए उसके जमीनी क्रियान्वयन की मांग की गई। यह संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अमरावती के युवाओं के अधिकार और भविष्य के लिए किया गया।
अमरावती आईटी पार्क के लिए क्यों उपयुक्त?
अमरावती पश्चिम विदर्भ का प्रमुख शैक्षणिक और प्रशासनिक केंद्र है। यहां संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय, रायसोनी विश्वविद्यालय सहित 400 से अधिक महाविद्यालय और 165 से अधिक तकनीकी व इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
हर वर्ष यहां से 25,000 से अधिक आईटी और तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवा निकलते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने के कारण उन्हें पुणे, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है। इससे कम वेतन, अस्थिर नौकरियां और सामाजिक असंतुलन जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए आईटी पार्क की स्थापना को एक स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
