अमरावती कोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष का कठोर कारावास
Amravati Court Verdict: अमरावती जिला एवं सत्र न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
Amravati Court (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Amravati Physical Abuse Case: अमरावती जिला व सत्र अदालत ने एक नाबालिग लड़की को बहलाफुसलाकर उसके साथ बारबार दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने के गंभीर मामले में अपना फैसला सुनाया है। जिला व सत्र न्यायाधीश वाय. ए. गोस्वामी ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कडी कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर आरोपी को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
सजा सुनाए गए आरोपी का नाम अमोल वसंतराव उरकुडे 36, पिंपलखुटा है। घटना 18 अप्रैल 2016 की है। पीड़िता मूल रूप से वर्धा जिले की रहने वाली थी। वह जिले के धामणगांव रेलवे तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिंपलखुटा में अपने एक रिश्तेदार की शादी में आई थी। शादी के दौरान जब पीड़िता अपनी छोटी बहन के साथ थी, तब आरोपी अमोल उरकुडे ने उसका हाथ पकड़ा और उसे जबरन एक झोपड़ी में ले गया। वहां आरोपी ने पीड़िता की मर्जी के खिलाफ उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
शादी में आई नाबालिग से दुष्कर्म
इसके बाद आरोपी ने दो से तीन बार पीड़िता के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया, जिससे नाबालिग पीड़िता गर्भवती हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। चूंकि लड़की नाबालिग थी, इसलिए जब उसे प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब यह पूरा मामला सामने आया। अस्पताल में पीड़िता द्वारा दिए बयानों के आधार पर मंगरूल दस्तगीर थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।कोर्ट में 15 गवाहों की हुई गवाहीइस मामले की जांच तत्कालीन पुलिस उपनिरीक्षक राजेंद्र होटे ने की थी।
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आरोपी को 10 साल की कैद और जुर्माना
पर्याप्त सबूत मिलने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। जिला व सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सरकारी अभियोजक सोनाली क्षीरसागर ने कड़े सबूत पेश करते हुए कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी अमोल उरकुडे को दोषी पाया। मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोजक एड. सोनाली क्षीरसागर ने पैरवी की, जबकि अदालती कार्रवाई और समन्वय में पुलिस हेड कांस्टेबल रोशन दुधे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
