सिंहस्थ कुंभमेले के लिए रेलवे का मेगाप्लान: चलेंगी 150 विशेष ट्रेनें, नासिक के 5 स्टेशनों का होगा आधुनिकीकरण

Nashik Special Trains: सिंहस्थ कुंभमेले के लिए रेलवे 150 'कुंभविशेष' ट्रेनें चलाएगा। नासिकरोड सहित 5 स्टेशनों का आधुनिकीकरण कर उन्हें टर्मिनस के रूप में विकसित किया जा रहा है।
Indian Railways planned 150 special trains and the modernization of 5 stations including Nashik Road to manage over 3 crore passengers during Kumbh Mela.
सिंहस्थ कुंभमेले रेलवे (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Nashik Kumbh Mela 2027 Special Trains: सिंहस्थ कुंभमेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे प्रशासन ने 150 से अधिक 'कुंभविशेष' ट्रेनों को चलाने का मेगाप्लान तैयार किया है। प्रत्येक शाही स्नान के दौरान उत्तर भारत से 75 और दक्षिण भारत से 75 अतिरिक्त ट्रेनें रोजाना चलाई जाएंगी।

कुंभमेले में मुख्य पर्वणी (शाही स्नान) के दौरान रामकुंड (नासिक) और कुशावर्त तीर्थ (त्र्यंबकेश्वर) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। 2027 में होने वाले इस महाआयोजन में पहली और दूसरी पर्वणी क्रमशः 2 अगस्त और 31 अगस्त को है, जबकि तीसरी पर्वणी नासिक में 11 सितंबर और त्र्यंबकेश्वर में 12 सितंबर को होगी। इन तिथियों के आसपास विशेष ट्रेनों की संख्या सर्वाधिक रहेगी। कुंभमेले के दौरान रेलवे का लक्ष्य 3 करोड़ से अधिक यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना है।

स्टेशनों का विकेंद्रीकरण और आधुनिकीकरण

नासिकरोड मुख्य स्टेशन पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए रेलवे ने निम्नलिखित योजना बनाई है- उत्तर भारत से आने वाली ट्रेनेंः ओढा, कसबे सुकेणे और खेरवाडी स्टेशनों पर रुकेंगी। दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनेंः देवलाली और नासिकरोड स्टेशनों पर रुकेंगी, कामाख्या, हावड़ा, पटना, दिल्ली, जयपुर, बीकानेर, नागपुर, नांदेड़ सहित गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों से आने वाली विशेष ट्रेनों और लोकल मेमू सेवाओं के लिए इन पांच स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

पांच स्टेशनों पर जारी हैं ये विकास कार्य

रेलवे द्वारा चयनित इन पांच स्टेशनों-नासिकरोड, देवलाली, ओढा, खेरवाडी और कसबे सुकेणे-पर बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और रेलवे लाइनें। पादचारी पुल और प्रतीक्षा कक्ष। पानी की टंकी और नए आधुनिक शौचालय। सांडपाणी प्रक्रिया संयंत्र।

इस आधुनिकीकरण का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों के संचालन को सुगम बनाना है, जिससे विभिन्न दिशाओं से आने वाली गाड़ियां इन स्टेशनों को 'टर्मिनस' या 'ओरिजिन स्टेशन' के रूप में इस्तेमाल कर सकें। इससे श्रद्धालुओं को यात्रा में आसानी होगी और स्टेशन पर भीड़ का प्रबंधन बेहतर हो पाएगा।

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