Amravati Biogas Plant News: अमरावती ग्रामीण इलाकों में एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। घंटों कतारों में लगने और आपूर्ति में देरी के कारण रसोई का बजट और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
इस समस्या के स्थाई और पर्यावरण अनुकूल समाधान के रूप में अब सरकार बायोगैस संयंत्र को बढ़ावा दे रही है। फोटो बायोगैस1,2सरकार से मिलने वाली आर्थिक मददकेंद्र सरकार के राष्ट्रीय बायोगैस और जैविक उर्वरक प्रबंधन कार्यक्रम के तहत बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है संयंत्र की क्षमता के आधार पर 14,350 रुपये से लेकर 29,250 रुपये तक का अनुदान दिया जाता है।
यदि बायोगैस संयंत्र को शौचालय से जोड़ा जाता है, तो 1,600 रुपये का अतिरिक्त अनुदान भी मिलता है। क्या है बायोगैस और इसके फायदेबायोगैस एक जैविक प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाली गैस है। जब गोबर और जैविक कचरे को बिना ऑक्सीजन वाली बंद टंकी में रखा जाता है, तो सूक्ष्मजीवों की प्रक्रिया से मीथेन गैस तैयार होती है।
इसका उपयोग सीधे रसोई में खाना पकाने के लिए किया जा सकता है। संयंत्र से निकलने वाली स्लरी अपशिष्ट खेतों के लिए सबसे उत्तम जैविक खाद है, जिससे रासायनिक खाद का खर्च बचता है। बायोगैस से बिजली उत्पादन और पानी पंप करने जैसे काम भी किए जा सकते हैं।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजइस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का ग्रामीण निवासी होना और उसके पास पशु गायभैंस होना आवश्यक है। आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन के दस्तावेज और फोटो। इच्छुक नागरिक अपने क्षेत्र की पंचायत समिति, कृषि विभाग कार्यालय या जिला ग्रामीण विकास यंत्रणा में संपर्क कर सकते हैं।
संयंत्र के लिए जगह का चयनबायोगैस संयंत्र के लिए घर या तबेले के पास ऐसी ऊंची और सूखी जगह चुननी चाहिए जहां पर्याप्त धूप आती हो। ध्यान रहे कि चुनी गई जगह के पास कोई पेड़, कुआं या हैंडपंप न हो। जमीन के नीचे पानी का स्तर कम से कम 2 मीटर नीचे होना चाहिए।