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अमरावती में प्राथमिक स्कूलों में घट रही छात्रों की संख्या, ‘समूह स्कूल’ मॉडल का तेजी से हो रहा विस्त

Amaravati school News: अमरावती में घटती छात्रसंख्या और संसाधनों की कमी से कई प्राथमिक शालाएं संकट में हैं। सरकार का ‘समूह स्कूल’ मॉडल शिक्षण गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम है।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Nov 17, 2025 | 05:12 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

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Amravati Primary School Crisis: अमरावती जिले की कई प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की संख्या तेजी से घट रही है। शिक्षक की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या में गिरावट, स्थानांतरित होने वाली आबादी तथा निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान इन सभी कारणों से जिला परिषद स्कूलों के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। ऐसे परिदृश्य में राज्य सरकार ने ‘समूह स्कूल’ मॉडल लागू कर शैक्षणिक संसाधनों का एकत्रीकरण करने का मार्ग अपनाया है।

शिक्षा व्यवस्था में होगा बदलाव

अमरावती जिले में इस प्रक्रिया को अब गति मिल रही है और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से दर्यापुर, भातकुली, अंजनगांव सुर्जी और चांदूर बाजार में कम छात्रसंख्या वाली शालाओं की संख्या अधिक है।

वैकल्पिक समाधान तलाशना जरूरी

अमरावती जिले की कई ग्रामीण शालाओं में विद्यार्थियों की संख्या 20 से भी कम रह गई है। कुछ विद्यालयों में तो बमुश्किल हाथ की उंगलियों पर गिनने लायक विद्यार्थी बचे हैं। इतनी कम संख्या में शालाएं संचालित रखना महंगा, शिक्षक उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण और मूलभूत सुविधाओं का प्रबंधन कठिन होता जा रहा है। इस कारण शिक्षा विभाग को वैकल्पिक समाधान तलाशना जरूरी हो गया था।

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समूह स्कूल बनने से शिक्षकों की सेवा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन फेरबदल अवश्य होगा। कुछ शिक्षकों का स्थानांतरण समूह स्कूल में, तो कुछ को अतिरिक्त कक्षा जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। शिक्षक संघों की प्रतिक्रिया मिली–जुली है। कुछ स्वागत कर रहे हैं, कुछ विरोध प्रकट कर रहे हैं।

एक शिक्षक पर अनेक कक्षाओं का भार

शिक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, कम छात्रों वाली शालाओं में शिक्षण वातावरण कमजोर होता है और कई जगह एक शिक्षक को अनेक कक्षाओं का भार उठाना पड़ता है। समूह स्कूल मॉडल इन समस्याओं का समाधान कर सकता है। अमरावती जिले में ‘समूह स्कूल’ मॉडल शिक्षा व्यवस्था का बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।जिसकी दिशा आने वाले कुछ महीनों में स्पष्ट होगी।

क्या है ‘समूह स्कूल’ मॉडल

‘समूह स्कूल’ का अर्थ है,नजदीक स्थित दो या अधिक कम छात्रसंख्या वाले विद्यालयों को मिलाकर एक सक्षम, संसाधनयुक्त एवं सुदृढ़ विद्यालय का निर्माण करना।

इससे मिलने वाले फायदे

  • विद्यार्थियों की संयुक्त संख्या बढ़ने से बेहतर शैक्षणिक वातावरण
  • शिक्षकों की उपलब्धता और उपयोगिता में सुधार
  • आधारभूत सुविधाओं का प्रभावी उपयोग
  • विद्यार्थियों को अधिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

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तहसीलवार शालाओं की स्थिति

तहसील कुल शालाएं 1 से 10 छात्रसंख्या वाली शालाएं
अचलपुर 128 18
अमरावती 108 16
मनपा क्षेत्र 4 0
अंजनगांव सुर्जी 87 27
भातकुली 110 28
चांदूर बाजार 122 18
चांदूर रेलवे 68 12
चिखलदरा 163 7
दर्यापुर 129 33
धामनगांव रेल्वे 83 6
धारणी 170 1
मोर्शी 102 12
नांदगाव खंडेश्वर 124 13
तिवसा 76 11
वरूड 106 11

जिले में प्रक्रिया की शुरुआत

अमरावती जिले से एक स्कूल का पहला प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। परंतु यह केवल शुरुआत है। आने वाले महीनों में और भी कई शालाओं का एकत्रीकरण होने की संभावना है। जिले के विभिन्न तहसीलों में ‘अत्यंत कम छात्रसंख्या’ वाली शालाओं की संख्या काफी अधिक है।

तहसील स्थिति चिंताजनक

ग्रामीण विद्यार्थियों को संसाधनयुक्त विद्यालय, बेहतर प्रतिस्पर्धी वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना इस योजना का सकारात्मक पक्ष है। पर चुनौतियां भी कम नहीं। कई विद्यार्थियों को नई शाला तक अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है, कुछ पालकों का मानसिक विरोध भी सामने आ सकता है, साथ ही शालाओं की स्थानीय पहचान और भावनात्मक जुड़ाव भी एक मुद्दा बनेगा।

Amaravati samuh school model education change

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Published On: Nov 17, 2025 | 05:12 PM

Topics:  

  • Amravati
  • Maharashtra
  • Maharashtra News

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