उद्धव-राज मिलकर करेंगे बालासाहेब का सपना साकार! जानिए कार्टूनिस्ट से हिंदूहृदय सम्राट तक का सफर

Bal Thackeray Punyatithi: आज हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर उनका सपना साकार होने की चर्चा हो रही है। आइए जानते है बालासाहेब के सफर के बारे में।
Balasaheb Thackeray Death Anniversary
बाबसाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि आज (डिजाइन फोटो)
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Balasaheb Thackeray Death Anniversary: हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि 17 नवंबर को मनाई जाती है। उन्होंने महाराष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस दिन, उनके प्रशंसक उनके विचारों, जीवन और हिंदुत्व के प्रति उनके मजबूत राष्ट्रवादी रुख को याद करते हैं।

बालासाहेब ठाकरे का जन्म 23 जनवरी, 1926 को पुणे में हुआ था। उनके पिता, केशव सीताराम ठाकरे 'प्रबोधनकार', खुद एक पत्रकार और कार्टूनिस्ट थे। अपने पिता से प्रेरणा लेते हुए, बालासाहेब ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई के फ्री प्रेस जर्नल में कार्टूनिस्ट के रूप में की थी। उनके कार्टून 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' के संडे एडिशन में भी प्रकाशित होते थे।

बालासाहेब अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके भाइयों में राज ठाकरे के पिता श्रीकांत ठाकरे भी शामिल थे। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उन्होंने 1966 में महाराष्ट्र में शिवसेना की स्थापना की।

बालासाहेब अक्सर कहा करते थे कि शिवसेना कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना है। उनका निधन 12 नवंबर 2012 को कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ था।

 उद्धव ने किया भावुक पोस्ट

बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके बेटे उद्धव ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भावुक वीडियो शेयर करते हुए उनको याद किया। उद्धव ने लिखा 'साहेब, आपने हमारे लिए कितना कुछ किया है। आपकी वजह से ही हमारी रीढ़ आज भी मजबूत है। जब तक 'हिंदू हृदय सम्राट' नामक शक्ति हमारे साथ है, हमें किसी बात का डर नहीं है।'

बालासाहेब का सपना होगा साकार

शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि के अवसर पर शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में मराठी मानुष और मराठी भाषा पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया कि उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने का प्रयोग बालासाहेब के एकजुटता के सपने को साकार कर रहा है।

uddhav and raj thackeray
उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे

महाराष्ट्र में मराठी मानुष की राजनीति को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने के प्रयोग से एक बार फिर बालासाहेब का सपना साकार होता दिख रहा है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव निकट हैं, और सभी की निगाहें मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावों पर टिकी हैं।

हिंदुत्व और राष्ट्रधर्म का आह्वान

बालासाहेब ठाकरे का प्रशासन बेहद आकर्षक और राष्ट्रवादी रुख वाला था। वह हिंदुत्व के मुखर समर्थक थे। उन्होंने सभी हिंदुओं से भाषाई बाधा को तोड़कर एक साथ आने और एक हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील की थी। बालासाहेब ने जर्मनी के फासीवादी शासक हिटलर की एक कलाकार के रूप में प्रशंसा की थी, लेकिन साथ ही यहूदियों की हत्या के लिए उनकी आलोचना भी की थी।

जनता के बीच उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई के शिवाजी पार्क में उनका वार्षिक संबोधन उनके अनुयायियों के बीच काफी लोकप्रिय था।

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