अप्पर वर्धा बांध के खुले गेट (सौजन्य-नवभारत)
Upper Wardha Dam Gates Open: अमरावती जिले का सबसे बड़ा अप्पर वर्धा बांध के 28 अगस्त को दोपहर 1 बजे 13 में से 3 गेट 5 सेंटीमीटर तक खोले गए। इसके माध्यम से 24.15 घनमीटर प्रति सेकंड से वर्धा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। बांध क्षेत्र में विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद गेट खोले गए।
यह पूजा अप्पर वर्धा परियोजना के कार्यकारी अभियंता अनिकेत सावंत, मोर्शी की सहायक अभियंता मनाली नंदागवली और शाखा अभियंता शुभम जयस्वाल की उपस्थिति में की गई। बांध के कैचमेंट एरिया में लगातार हो रही भारी बारिश और जलालखेडा से बहकर आई वर्धा नदी में आई बाढ़ के कारण जलाशय का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था।
इसी वजह से गेट क्रमांक 1, 7 और 13 ऐसे 3 गेट खोलकर नियंत्रित रूप से विसर्ग शुरू किया गया। 27 अगस्त को ही वर्धा नदी किनारे बसे गांवों और मछुआरों को सतर्कता का संदेश जारी कर दिया गया था।
दोपहर 1 बजे तक बांध का जलसंग्रह 91.75 फीसदी तक था। निर्धारित जलस्तर 342.50 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 341.98 मीटर तक पहुंच गया है। मध्यप्रदेश से आने वाली जाम नदी और माडु नदी उफान पर होने के कारण जलसंग्रह तेजी से बढ़ रहा है। गेट खोले जाने से बांध का नजारा बेहद आकर्षक हो गया है। पानी के छींटों का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक बांध परिसर में पहुंच रहे हैं।
भीड़ को देखते हुए पुलिस बंदोबस्त तैनात करना आवश्यक हो गया है। पिछले वर्ष बांध के 13 में से 3 गेट 5 अगस्त को और फिर 14 अगस्त को 11 गेट खोले गए थे। उस समय परिसर को रंगीन रोशनाई से सजाया गया था, जिसने पर्यटकों को खूब आकर्षित किया था। इस वर्ष बारिश कम होने से बांध के गेट खोलने में विलंब हुआ है।
शहानूर मध्यम परियोजना के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण जलाशय का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह से गुरुवार की शाम 4 बजे तक जलाशय स्तर 446.50 मीटर तक पहुंच गई है, जो कि कुल क्षमता का 82.11 प्रतिशत है। बांध प्रचलन सूची के अनुसार अगस्त माह के अंत तक जलाशय की अनुमानित जलस्तर 445.05 मीटर और जलसंग्रह 75.11 प्रतिशत होना चाहिए था।
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किंतु अधिक वर्षा के चलते जलस्तर अपेक्षा से अधिक दर्ज किया गया है। स्थिति को देखते हुए गुरुवार की शाम 6 बजे शहानूर बांध के चार गेट 20 सेंटीमीटर तक खोलकर 58.00 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से नदी पात्र में पानी छोडा गया। आने वाले 24 घंटों में जलस्तर और वर्षा की स्थिति के आधार पर पानी की मात्रा में बढ़ोतरी या कमी की जा सकती है।