अमरावती के 137 जिला परिषद स्कूलों के 230 क्लासरूम जर्जर, हजारों बच्चों की सुरक्षा पर खतरा

Amravati Student Safety: अमरावती जिले के 137 जिला परिषद स्कूलों के 230 क्लासरूम जर्जर स्थिति में हैं। मानसून के बीच हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा खतरे में है।
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Zilla Parishad Schools (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Amravati Zilla Parishad Schools: अमरावती जिला परिषद स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा एक बार फिर दांव पर लग गई है। जिले के 137 स्कूलों के कुल 230 क्लासरूम बेहद जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। चौकाने वाली बात यह है कि शिक्षा विभाग ने इन जर्जर क्लासरूमों की मरम्मत या उन्हें ढहाने का प्रस्ताव गर्मियों की छुट्टियों में नहीं, बल्कि अब मानसून की शुरुआत होने के बाद भेजा है। विभाग के इस नियोजन शून्य और ढीले रवैये के कारण हजारों विद्यार्थियों की जान को सीधा खतरा पैदा हो गया है।

नियमों के मुताबिक स्कूलों की मरम्मत का काम गर्मियों की छुट्टियों में ही पूरा हो जाना चाहिए था, ताकि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में बच्चों को सुरक्षित कमरे मिल सकें। लेकिन समय पर प्रस्ताव न भेजे जाने के कारण अब पूरी प्रक्रिया अधर में लटक गई है। खतरनाक छतों के नीचे बैठने को मजबूर बच्चेवर्तमान में जिले में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है। ऐसे में इन जर्जर स्कूलों में छतों से पानी टपकने, दीवारों में दरारें आने, अचानक प्लास्टर गिरने और पूरी इमारत के ढहने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

मानसून में जर्जर स्कूल भवनों का खतरा बढ़ा

इस डरावने माहौल के बीच बच्चों को स्कूल भेजने पर माता-पिता और अभिभावकों में भारी चिंता और डर का माहौल है। स्ट्रक्चरल ऑडिट और टेंडर के चक्रव्यूह में फंसा मामलापंचायत समितियों से मिले प्रस्तावों के आधार पर अब इन 230 क्लासरूमों का स्ट्रक्चरल ऑडिट लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कराया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि किस इमारत को गिराना है और किसकी मरम्मत करनी है।

अमरावती में शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर

ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद प्रशासनिक मंजूरी, फंड का आवंटन, निविदा प्रक्रिया और फिर कहीं जाकर प्रत्यक्ष काम शुरू होगा। इस लंबी और कछुआ गति से चलने वाली प्रक्रिया के कारण बच्चों को सुरक्षित क्लासरूम कब मिलेंगे, इस पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन समितियों में तीव्र आक्रोश है। अभिभावकों ने किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना, बच्चों की सुरक्षा के लिए तुरंत वैकल्पिक और ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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