Akola News: गुरूवार की दोपहर में उमस के बाद देर शाम मौसम ने अचानक करवट बदलते हुए किसानों पर कहर बरपाया. इसी तरह गुरूवार की शाम लगभग साढ़े पांच बजे अकोट तहसील के कई गांवों में तेज हवा के साथ ओलावृष्टि हुई, जबकि शहर में मध्यरात्रि के बाद बारिश की फुहारें पड़ीं.
इस असमय वर्षा और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.लगभग आधे घंटे तक चली इस ओलावृष्टि ने वडाली देशमुख, सावरा, रंभापुर, वडनेर, कालवाडी, आसेगांव और कवठा बु. सहित आसपास के क्षेत्रों में रबी की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया.
खेतों में खड़े गेहूं, चना और प्याज की फसलें जमीन पर बिछ गईं. कई किसानों का चना पूरी तरह बर्बाद हो गया, जबकि गेहूं और प्याज की कटाई पर भी पानी फिर गया. मंदिरों में आयोजित भंडारे और यात्राओं पर भी इस प्राकृतिक आपदा का असर पड़ा और ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई.
सावरगांव, धनकवाडी और आसेगांव बाजार क्षेत्र में रबी फसलों का विदारक दृश्य देखने को मिला. किसानों ने बताया कि चने की फलियां टूटकर गिर गईं और गेहूं की बालियां झड़ गईं. ज्वार, मक्का, नींबू, प्याज, पपीता, गेहूं, संतरा, चना और तरबूज जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.
किसानों की मांग किसानों ने प्रशासन से तत्काल पंचनामा कर उचित मुआवजा देने की मांग की है. उनका कहना है कि यह असमय बारिश और ओलावृष्टि ने उन्हें पूरी तरह निराश कर दिया है. कई किसान पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं और अब फसल बर्बाद होने से उनकी स्थिति और गंभीर हो गई है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर राहत नहीं मिली तो वे आगामी सीजन की खेती करने में असमर्थ होंगे. प्रशासन के सामने चुनौती किसानों को ऊर्जा और सिंचाई के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. अब इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया है.
प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाए.
प्राथमिक नुकसान का अनुमान तहसीलहेक्टेयर पातुर 38 अकोला 1.20 अकोट 83 कैप्शन अकोला.