अकोला. मोर्णा स्वच्छता अभियान काफी ढिंढोरा पीट कर शुरू किया गया, मगर फिलहाल नदी का पूरा पाट जलकुंभी से भरा हुआ है. इस बात की सरासर उपेक्षा की जा रही है. अब तो लगने लगा है जैसे मोर्णा की स्वच्छता का कार्य बारिश को सौंप दिया गया है. यदि बारिश के पानी नदी साफ होती है तो ठीक है, यदि ऐसा नहीं होता तो भी हम कुछ नहीं करेंगे.
तत्कालीन जिलाधिकारी आस्तिककुमार पाण्डेय के कार्यकाल में मोर्णा स्वच्छता अभियान चलाया गया था, मगर वह मुहिम अब समाप्त हो गई है व नदी का पाट एक बार फिर जलकुंभी से भर गया है. इससे नदी तट पर रहने वाले नागरिकों को बहुत परेशानी हो रही है. मच्छरों की पैदावार भी बहुत बढ़ गई है व लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है. मनपा द्वारा शहर के नालों की स्वच्छता पर तो ध्यान दिया गया, मगर मोर्णा नदी उपेक्षित ही पड़ी रही.
मोर्णा नदी तट पर पथदीप एवं सौंदर्यीकरण करने व उसके जरिए युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी, जो कागजों तक ही सिमटकर रह गई है. शहर में युवकों को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने में सक्षम उद्योग नहीं हैं. इस दिशा में कार्य शुरू किए गए हैं. यदि वैसा हो सके तो इस भाग के युवकों लिए अच्छे दिन साबित हो सकेंगे.