शहर की बाजार वसूली के लिए जल्द जारी होंगी निविदाएं, अखिरकार मनपा प्रशासक ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

Akola News: अकोला महानगरपालिका की बाजार वसूली से संबंधित निविदा प्रक्रिया के प्रस्ताव को मनपा प्रशासक डा. सुनील लहाने ने मंजूरी दे दी है। कुछ दिनों में निविदाएं प्रकाशित की जाएंगी।
Akola News: अकोला महानगरपालिका की बाजार वसूली से संबंधित निविदा प्रक्रिया के प्रस्ताव को मनपा प्रशासक डा. सुनील लहाने ने मंजूरी दे दी है। कुछ दिनों में निविदाएं प्रकाशित की जाएंगी।
अकोला महानगरपालिका की बाजार वसूली निविदा (सौजन्य-नवभारत)
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Akola News: अकोला महानगरपालिका की बाजार वसूली से संबंधित निविदा प्रक्रिया का रास्ता अब साफ हो गया है। मनपा प्रशासक डा. सुनील लहाने ने इस संदर्भ में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके परिणामस्वरूप आगामी कुछ दिनों में निविदाएं प्रकाशित की जाएंगी, जिससे मनपा को प्रति वर्ष लगभग दो करोड़ रु। का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।

शहर में सड़क किनारे तथा मनपा द्वारा निर्धारित स्थलों पर हाथगाड़ी या जमीन पर बैठकर व्यवसाय करने वालों से प्रतिदिन निश्चित शुल्क वसूला जाता है। पूर्व में यह कार्य ठेका पद्धति से किया जाता था, लेकिन 31 दिसंबर को स्वाति कंपनी का ठेका रद्द कर दिया गया। तब से यह कार्य मनपा के कर्मचारी कर रहे हैं।

बाजार वसूली के लिए 6 कर्मचारी नियुक्त

हालांकि, मनपा का क्षेत्रफल 124 वर्ग किमी है, लेकिन बाजार वसूली के लिए केवल 6 कर्मचारी नियुक्त हैं, जिससे वसूली की राशि अत्यंत कम हो रही है। वर्तमान में बाजार वसूली शुल्क 10 से 15 रुपये है। प्रशासन ने इसमें वृद्धि करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए एक समिति का गठन किया गया। समिति ने शुल्क को दोगुना करने का प्रस्ताव दिया। लेकिन आठ महीने बीत जाने के बावजूद निविदा प्रक्रिया पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिससे मनपा को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है।

निर्णय में एकमत की देरी बनी बाधा

पूर्व में बाजार वसूली का ठेका 96 लाख रुपये में दिया गया था। उस स्थिति में ठेकेदार द्वारा कितनी भी वसूली की जाए, मनपा को वार्षिक रूप से 96 लाख रुपये का राजस्व सुनिश्चित होता था। अब प्रशासन को सीधे तीन करोड़ रुपये की निविदा की अपेक्षा है। लेकिन अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक की निविदाएं प्रकाशित न होने के कारण यह संदेह बना हुआ था कि तीन करोड़ की निविदाएं प्राप्त होंगी या नहीं। इस विषय पर प्रशासन के अधिकारियों में एकमत नहीं बन पा रहा था, जिससे निर्णय में देरी हुई और निविदा प्रक्रिया अटक गई।

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