Akot Palkhi: भक्ति और सेवा का संदेश देती संत वासुदेव महाराज की पालकी पंढरपुर की ओर अग्रसर
Hingoli Palkhi Yatra: श्रीक्षेत्र श्रद्धासागर, अकोट से पंढरपुर के लिए निकली संत वासुदेव महाराज की 16वीं पालकी यात्रा हिंगोली जिले से भक्तिमय वातावरण में आगे बढ़ रही है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Akot Palkhi (सोर्सः सोशल मीडिया)
Saint Vasudev Maharaj Palkhi: संतों के नामों का अखंड जयघोष, टाल-मृदंग की मधुर ध्वनि, अभंगों की स्वर लहरियों और हजारों वारकरियों की अटूट श्रद्धा के बीच श्रीक्षेत्र श्रद्धासागर, अकोट से श्रीक्षेत्र पंढरपुर के लिए निकली विश्वरत्न माऊली संत वासुदेव महाराज की भव्य पालकी यात्रा हिंगोली जिले से भक्तिमय वातावरण में आगे बढ़ रही है। जिलेभर में सामाजिक संस्थाओं, श्रद्धालुओं और नागरिकों ने पालकी का जगह-जगह भव्य स्वागत किया। पालकी यात्रा का यह 16वां वर्ष है।
भक्ति ही शक्ति और सेवा ही धर्म का संदेश देती यह यात्रा अध्यात्म के साथ समाज जागरण, पर्यावरण संरक्षण, समता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानव सेवा का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है। हिंगोली में प्रवेश करते ही कनेरगांव में पुरुषोत्तम बाहेती के नेतृत्व में श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। यहां कीर्तन, हरिनाम सप्ताह, महाप्रसाद तथा रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संत वासुदेव महाराज की पावन पादुकाओं के दर्शन किए।
भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इसके बाद पालकी के येहेलेगांव पहुंचने पर पूरा गांव भगवा ध्वज, रंगोली और पुष्प सज्जा से सुसज्जित दिखाई दिया। पालकी पूजन, आरती और हरिनाम संकीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने माऊली का स्वागत किया। कई सामाजिक संगठनों ने वारकरियों के लिए चाय, नाश्ता, महाप्रसाद तथा जीवनोपयोगी सामग्री वितरित कर वारकरी सेवा ही विठ्ठल सेवा का संदेश दिया।
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पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता का भी संदेश
इस पालकी यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता अध्यात्म के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का संदेश है। हिंगोली और ओढा के मुकामों पर हजारों श्रद्धालुओं ने संत वासुदेव महाराज की पवित्र पादुकाओं के दर्शन किए। नागरिकों ने तन, मन और धन से सहयोग देकर यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यात्रा के सफल संचालन में वासुदेवराव महल्ले, अंबादास महाराज मानकर, माधवराव ठाकरे, गजानन दुधाल, सेवाव्रती अनिल कोरपे तथा हिंगोली जिले के समस्त गुरुमाऊली भक्त परिवार का विशेष योगदान रहा।
पंढरपुर की ओर बढ़ता आस्था का महायज्ञ
भक्ति, सेवा, समता, पर्यावरण संरक्षण और समाज जागरण का संदेश देती संत वासुदेव महाराज की पालकी अब श्रीक्षेत्र पंढरपुर की ओर निरंतर अग्रसर है। वारी चलती-फिरती संस्कृति है, सेवा ही साक्षात विठ्ठल है और हरिनाम जीवन का अमृत है। इस भावना को आत्मसात कराता यह भक्तिमय महोत्सव हिंगोलीवासियों के लिए अविस्मरणीय बन गया है। यह जानकारी गजानन हरणे ने दी।
