विधानसभा में गूंजा अकोला मुद्दा: 300 मीटर सड़क से 700 हेक्टेयर विस्तार तक सब अटका
Akola Budget News: विधायक रणधीर सावरकर ने विधानसभा में अकोला औद्योगिक बस्ती के विस्तार और सहकारी सूत गिरनियों के लंबित प्रस्तावों पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासनिक ढिलाई पर अंकुश लगाने की मांग की।
- Written By: रूपम सिंह
Randhir Savarkar (सोर्स: सोशल मीडिया)
Akola Assembly Budget Session News: विधानसभा में 16 मार्च को बजट चर्चा के दौरान विधायक रणधीर सावरकर ने अकोला औद्योगिक बस्ती से जुड़ी भूमि अधिग्रहण की लंबित प्रस्तावना पर प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि महज 300 मीटर सड़क के भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव अधिकारियों की लापरवाही के कारण वर्षों से अटका हुआ है। इस सड़क पर लगातार यातायात जाम की स्थिति बनती है, जिसके चलते पूर्व विधायक की दुर्घटना में मौत भी हो चुकी है। विधायक सावरकर ने स्पष्ट किया कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रस्ताव तत्काल मंजूर होना चाहिए।
साथ ही उन्होंने औद्योगिक बस्ती विस्तार हेतु प्रस्तुत 700 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव को भी सरकार से शीघ्र मंजूरी देने की मांग की। वस्त्र नीति और सहकारी सूत गिरनियों का प्रश्न विधायक सावरकर ने राज्य की वस्त्र नीति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदर्भ के कपास उत्पादक क्षेत्र की सहकारी सूत गिरनियों के प्रकल्पों को वित्त एवं नियोजन विभाग विवेकहीन ढंग से रोक रहा है।
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उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सहकारी सूत गिरनियों का प्रकल्प अहवाल 80.90 करोड़ रु. से बढ़ाकर 118 करोड़ रु. करने का प्रस्ताव वित्त विभाग में लंबित है। भूमि, निर्माण, मशीनरी और अन्य घटकों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद विभाग ने फाइल को अटका रखा है।
6 माह में हुई मशनरी कीमतों में वृद्धि
उन्होंने बताया कि सहकारी सूत गिरनियों का प्रकल्प अहवाल महासंघ ने वर्ष 2018 में सरकार को प्रस्तुत किया था, जिसे 2021 में 61.74 करोड़ से संशोधित कर 80.90 करोड़ रु. की मंजूरी दी गई। लेकिन बीते छह वर्षों में भूमि, निर्माण और मशीनरी की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके आधार पर 118 करोड़ रु. का संशोधित प्रकल्प अहवाल सरकार को भेजा गया है। यह फाइल वर्तमान में वित्त विभाग में लंबित है और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति की बैठक आयोजित कर मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही है।
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किसानों और उद्योगों को न्याय की मांग
विधायक रणधीर सावरकर ने कहा कि एक ओर सरकार कपास उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए वस्त्र नीति में बदलाव कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक तंत्र किसानों और सहकारी संस्थाओं की राह में रोड़ा बन रहा है।
प्रशासनिक ढिलाई पर अंकुश लगाएं
यदि सस्कार वास्तव में किसानों और उद्योगों को सशक्त बनाना चाहती है तो उसे प्रशासनिक दिलाई पर अंकुश लगाना होगा। उन्होंने मांग की कि अकोला औद्योगिक बस्ती के विस्तार और सहकारी सूत गिरनियों के प्रकल्प अहवाल को शीघ्र मंजूरी दी जाए, ताकि विदर्भ के कपास उत्पादक किसानों और उद्योगों को न्याय मिल सके। (रणधीर सावरकर, विधायक)
