Akola News: नरखेड़ में जलवायु अनुकूल तकनीक पर आधारित डिजिटल खेतीशाला सत्र2 का आयोजन पानी फाउंडेशन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का संचालन कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी आत्मा द्वारा किया गया।
सत्र में जैविक एवं प्राकृतिक आदान उत्पादन विषय पर बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, निंबोली अर्क और दशपर्णी अर्क के निर्माण एवं उपयोग पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही बीज उपचार और जैविक कीटनाशकों के उपयोग की जानकारी भी किसानों को दी गई। कृषि सचिव परिमल सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के कारण किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
ऐसे में जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाना समय की जरूरत है।डॉ. मीनाक्षी पाटिल ने बीजामृत और बीज संस्कार के महत्व को बताया। प्रो. व्यंकट शिंदे ने जीवामृत बनाने की प्रक्रिया समझाई। वहीं डॉ. नंदकुमार भुते ने जैविक कीटनाशकों के उपयोग से लागत घटाने और मित्र कीटों के संरक्षण पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मनोज कोरडे, राजेश क्षीरसागर, अजय सोमकुवर, राजेंद्र बालपांडे, बलिराम सातपुते, कार्तिक कोली सहित कई गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। अंत में किसानों की शंकाओं का समाधान किया गया।किसानों की सक्रिय भागीदारीविभिन्न किसान समूहों ने इस शेतीशाला में भाग लेकर प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम से किसानों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ी है। कार्यक्रम का समापन नीलेश रिधोरकर द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।