मंदिरों की जमीन बचाओ: अकोला के वकीलों ने महाराष्ट्र में एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट की मांग उठाई
Akola News: महाराष्ट्र में मंदिरों की जमीनों पर बढ़ते अवैध कब्जों को रोकने के लिए अकोला चैरिटी बार एसोसिएशन और 150 अधिवक्ताओं ने गुजरात-कर्नाटक की तरह एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट लागू करने की मांग की है।
- Written By: आकाश मसने
चैरिटी बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र (फोटो नवभारत)
Anti Land Grabbing Act News: महाराष्ट्र में मंदिरों और देवस्थान की जमीनों के बढ़ते अवैध हस्तांतरण ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। इस पृष्ठभूमि में अब विधि क्षेत्र से भी कठोर कानून बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। अकोला चैरिटी बार एसोसिएशन ने सीधे मुख्यमंत्री महाराष्ट्र राज्य को पत्र लिखकर गुजरात और कर्नाटक की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ तत्काल लागू करने की ठोस मांग की है।
एसोसिएशन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भूमाफिया द्वारा मंदिरों की जमीनें हड़पने से केवल धार्मिक संस्थाओं का ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के श्रद्धास्थलों का नुकसान हो रहा है। अधिवक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि महाराष्ट्र में ऐसा कठोर कानून बने जो दखलपात्र और अजामीनपात्र हो, ताकि मंदिरों की जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हस्ताक्षर अभियान चलाया गया
इस अभियान को अकोला जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं का भी व्यापक समर्थन मिला है। सनातन संस्था की साधक अधिवक्ता श्रुति भट और उनके सहयोगी अधिवक्ताओं ने महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से एक निवेदन तैयार कर हस्ताक्षर अभियान चलाया। इस निवेदन पर 150 से अधिक अधिवक्ताओं ने उत्साहपूर्वक हस्ताक्षर किए।
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निवेदन को विधि क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि विषय अत्यंत गंभीर है और कठोर कानून की आवश्यकता अब टाली नहीं जा सकती। अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से शासन से अपील की है कि मंदिरों की जमीनों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
महाराष्ट्र में भी कानून लागू होना चाहिए
अकोला जिला न्यायालय में इस निवेदन को लेकर चर्चा का माहौल बन गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कानून नहीं बनाया गया तो भूमाफिया मंदिरों की जमीनें हड़पते रहेंगे और समाज के श्रद्धास्थल खतरे में पड़ जाएंगे। गुजरात और कर्नाटक में पहले से ही ऐसे कानून लागू हैं, जिनके तहत धार्मिक संस्थाओं की जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाती है।
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अधिवक्ताओं का मानना है कि महाराष्ट्र में भी इसी प्रकार का कानून लागू होना चाहिए, ताकि मंदिरों की जमीनें सुरक्षित रहें और समाज की आस्था को ठेस न पहुँचे। एसोसिएशन के पत्र और अधिवक्ताओं के सामूहिक समर्थन ने इस मुद्दे को और अधिक गंभीर बना दिया है। अब सबकी निगाहें शासन पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर क्या निर्णय लेता है।
मंदिरों की जमीनों की रक्षा के लिए नई दिशा
अकोला चैरिटी बार एसोसिएशन और 150 से अधिक अधिवक्ताओं के समर्थन से उठी यह मांग महाराष्ट्र में मंदिरों की जमीनों की सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। यदि शासन ने समय रहते कठोर कानून लागू किया तो भूमाफियाओं की अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और समाज के श्रद्धास्थल सुरक्षित रहेंगे। इस आंदोलन ने मंदिरों की जमीनों की रक्षा के लिए एक नई दिशा प्रदान की है।
