Kharif Season 2026: किसानों की ठगी पर सख्ती, अकोला में 10 कृषि सेवा केंद्रों पर कार्रवाई
Krishi Seva Kendra Raid: अकोला में कृषि सामग्री की बिक्री में गड़बड़ी मिलने पर जिला कृषि विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 7 केंद्रों के लाइसेंस रद्द और 3 को निलंबित कर दिया है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - AI)
Action Against 10 Agricultural Service Centers in Akola: आगामी खरीफ मौसम के मद्देनज़र किसानों को घटिया दर्जे की सामग्री और ठगी से बचाने के लिए जिला कृषि विभाग ने एक बहुत बड़ी और दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है. जिले के विभिन्न इलाकों में कृषि निविष्ठा (खाद, बीज और कीटनाशक) की बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और गड़बड़ियां पाई गई हैं।
इस पर जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी डॉ. मुरली इंगले ने बेहद कठोर रुख अपनाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले 7 कृषि सेवा केंद्रों के लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त (रद्द) कर दिए हैं. इसके साथ ही 3 अन्य केंद्रों के लाइसेंस को 1 से 2 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है, जबकि गंभीर त्रुटियां पाए जाने वाले 6 केंद्रों को अंतिम और सख्त चेतावनी दी गई है।
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इन 7 कृषि सेवा केंद्रों के लाइसेंस हुए हमेशा के लिए रद्द
कृषि विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिन केंद्रों के लाइसेंस को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है, उनकी सूची इस प्रकार है
- राय कृषि सेवा केंद्र – बोर्डी (अकोट)
- मोहन ट्रेडर्स – अकोली जहांगीर
- महालक्ष्मी कृषि सेवा केंद्र – तलेगाव बु. (तेल्हारा)
- शिवशक्ति एग्रोटेक – सस्ती (पातुर)
- शेतकरी कृषि सेवा केंद्र – खानापुर रोड (पातुर)
- बलीराजा कृषि सेवा केंद्र – वाडेगाव
- जगदंबा एग्रो एजन्सीज व एग्रोटेक – बादलापुर
यह केंद्र हुए निलंबित; दुकानों में पाई गई यह गंभीर गड़बड़ियां
अस्थायी रूप से निलंबित किए गए केंद्रों में ‘आपलं ग्रोमर कृषि सेवा केंद्र’ (निंबा फाटा, बालापुर) को 1 माह, ‘शेतकरीपुत्र कृषि सेवा केंद्र’ (वारखेड, तेल्हारा) को 2 माह और ‘मातोश्री कृषि सेवा केंद्र’ (कापशी रोड) को 1 माह के लिए निलंबित किया गया है।
कृषि अधिकारियों द्वारा की गई औचक जांच के दौरान इन दुकानों में कई गंभीर कमियां पाई गईं। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह थी कि विक्रेताओं की ‘ई-पॉस‘ मशीन में दर्ज अधिकृत सरकारी स्टॉक और दुकान के भीतर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया। इसके अलावा दुकानों में अनिवार्य रूप से लगाया जाने वाला स्टॉक बोर्ड और प्रतिदिन की प्राइस लिस्ट अपडेट नहीं थी।
कई केंद्र किसानों को पक्की रसीदें नहीं दे रहे थे, और जो दे भी रहे थे वे निर्धारित सरकारी प्रारूप (फॉर्मेट) में नहीं थीं। साथ ही दुकानों का मुख्य वैधानिक लाइसेंस प्रमाणपत्र भी ग्राहकों को दिखाई देने वाले स्थान पर प्रदर्शित नहीं किया गया था।
किसानों के लिए कृषि विभाग की विशेष गाइडलाइन व शिकायत निवारण
खरीफ के इस महत्वपूर्ण सीजन में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचने के लिए कृषि विभाग ने किसानों के लिए कुछ बेहद जरूरी सावधानियां जारी की हैं:
- कृषि केंद्रों से खाद या बीज खरीदते समय हमेशा ‘पक्की रसीद’ (कैश मेमो) अवश्य मांगें।
- रसीद पर सामग्री का लॉट नंबर, बैच नंबर और छपे हुए सही मूल्य की अच्छी तरह से जांच कर लें।
- केवल सरकार के पास पंजीकृत और प्रामाणिक कंपनियों के कृषि उत्पादों को ही प्राथमिकता दें।
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यदि किसी भी कृषि केंद्र पर कालाबाजारी, तय एमआरपी से अधिक दर पर बिक्री, या पक्की रसीद देने से साफ इनकार किया जाता है, तो किसान बिल्कुल न घबराएं। वे तुरंत इसकी लिखित शिकायत अपने नजदीकी तहसील कृषि अधिकारी कार्यालय या पंचायत समिति के ‘तक्रार निवारण कक्ष’ (शिकायत निवारण प्रकोष्ठ) में दर्ज कराएं।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी डॉ. मुरली इंगले ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि खरीफ मौसम में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, अवैध स्टॉक या खाद के साथ गैर-जरूरी दवाइयां जबरन बेचने (लिंकिंग) की प्रवृत्ति को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी दोषी पाए जाने वाले केंद्रों पर क्रिमिनल केस दर्ज किए जाएंगे।
