कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Akola News: महाराष्ट्र में चुनावों के साथ हमेशा चर्चा में रहने वाली लाडकी बहिन योजना एक बार फिर विवादों में है। इसका कारण यह है कि कई लाभार्थी महिलाओं को दिसंबर माह की राशि प्राप्त नहीं हुई। अकोला जिले में लगभग 2 हजार महिलाओं को लाभ नहीं मिला, जिससे नाराज महिलाएं महिला एवं बाल कल्याण विभाग में गईं और आक्रोश व्यक्त किया। कुछ स्थानों पर आंदोलन भी हुए। इस पर जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर समस्या समाधान का आश्वासन दिया।
अकोला जिले में इस योजना को उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला है। कुल 4 लाख 37 हजार महिलाएं लाभार्थी हैं। लेकिन सरकार द्वारा की गई ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद कई महिलाएं अपात्र हो गईं। इनमें 65 वर्ष से अधिक आयु की 4509 महिलाएं, 21 वर्ष से कम आयु की 450 लाभार्थी, ई-केवाईसी में गलती से मेल दर्ज हुईं 389 महिलाएं तथा अन्य त्रुटियों के कारण 39,419 महिलाएं शामिल हैं। कुल मिलाकर 45,167 महिलाएं लाभ से वंचित हुईं। इससे महिलाओं में रोष फैल गया और उन्होंने कार्यालय पर मोर्चा निकाला। विधायक रणधीर सावरकर और अधिकारियों ने मध्यस्थी कर महिलाओं को समझाया और सरकार स्तर पर समाधान का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना अंतर्गत ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है। दुरुस्ती के लिए मंगलवार को महिला एवं बाल कल्याण विभाग में भारी भीड़ उमड़ी। अब तक 2 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें सरकार को भेजा जाएगा। भीड़ को देखते हुए भवन में महिला पुलिस तैनात की गई और प्रवेश द्वार पर कर्मचारी नियुक्त किए गए।
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महिला एवं बाल विकास अधिकारी गिरीश पुसदकर ने बताया कि ई-केवाईसी में कई महिलाओं के नाम के आगे परिवार के सदस्य सरकारी नौकरी या पेंशनधारी दर्ज हो गए हैं। इससे वे भविष्य में अपात्र हो सकती हैं। कई लाभार्थियों ने अधिकारियों को आवेदन देकर कहा कि यह त्रुटि सेतू संचालक की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके परिवार में कोई सरकारी नौकरी नहीं करता, न ही चारपहिया वाहन है और वार्षिक आय 2.5 लाख से कम है।