अकोला में पुरानी पेंशन के लिए कर्मचारियों ने निकाला 'पेंशन ब्लैक मार्च', बोले- मुख्यमंत्री लिखित में करें घोषणा

महाराष्ट्र राज्य पुरानी पेंशन एसोसिएशन जिला अकोला शाखा की ओर से रविवार को जिला स्तरीय 'पेंशन ब्लैक मार्च' का आयोजन किया गया। मार्च में जिले भर से हजारों कर्मचारी काले कपड़े पहनकर शामिल हुए। मार्च स्वराज्य भवन से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक गया।
Employees took out a 'pension black march' for old pension
अकोला में आयोजित पेंशन ब्लैक मार्च में शामिल कर्मचारी
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अकोला: महाराष्ट्र राज्य पुरानी पेंशन एसोसिएशन जिला अकोला शाखा की ओर से रविवार को जिला स्तरीय 'पेंशन ब्लैक मार्च' का आयोजन किया गया। मार्च में जिले भर से हजारों कर्मचारी काले कपड़े पहनकर शामिल हुए। मार्च स्वराज्य भवन से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक गया। इस मौके पर मार्च में शामिल हजारों कर्मचारियों ने ध्यान खींचा।

कर्मचारियों की मांग है कि जो कर्मचारी भविष्य निधि सहित महाराष्ट्र सिविल सेवा (सेवानिवृत्ति वेतन) नियम, 1982 और महाराष्ट्र सिविल सेवा (सेवानिवृत्ति वेतन का वित्तपोषण) नियम, 1984 के अनुसार 1 नवंबर, 2005 के बाद सेवा में शामिल हुए, उन्हें पुरानी पेंशन एकमुश्त लागू करें। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही पेंशन संगठन की ओर से जुलाई-अगस्त माह में सभी जिलों में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर जगह-जगह मार्च और आंदोलन किए जा रहे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में संगठन की ओर से जिले में पेंशन ब्लैक मार्च निकालकर अलग से आंदोलन किया गया। इसके लिए स्वराज भवन से कलेक्टोरेट तक मार्ग पर पेंशन मार्च निकाला गया। मार्च को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष अमोल गुडधे ने प्रस्तावना रखी। यदि आपके पास लाडली बहन, लाडला भाई है, तो सरकार को राज्य के प्रशासनिक गढ़ कहे जाने वाले लाडले कर्मचारी क्यों नहीं चाहिए? उन्हें पुरानी पेंशन क्यों नहीं? उन्होंने ये सवाल पूछा।

राज्य स्तरीय सम्मेलन होगा

अमोल गुडधे ने कहा कि शीघ्र ही संगठन का राज्य स्तरीय सम्मेलन होगा और उसमें पेंशन के संबंध में ठोस लिखित निर्णय की घोषणा के लिए राज्य के मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया जाएगा। यदि वे इस संबंध में असमर्थता जताते हैं, तो संगठन के उस सत्र में विपक्षी दल के नेताओं को बुलाया जाएगा और उनकी उपस्थिति में राज्य स्तरीय सत्र आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर संगठन के रामदास वाघ, अभिजीत पांडे, देवेंद्र फोकमारे, राजेश डाखोरे, सुधाकर पांडे, कैलास इंगोले, योगेश कोहर, संदीप पिसे, शुभांगी गोपनारायण, गोपाल संगुनवेढे, बलराज वानखड़े, साजीत राणा, सचिन नंदापुरे, श्रीकांत रत्नपारखी, मोहम्मद जुबेर, संतोष बदने, रूपेश वासनकर, संदीप बाठे, विलास चावरे, नंदलाल काकुलकर, अनिल सुरवाडे, अविनाश वाघ, अजय अवारे, अमोल पालखेड़े, श्याम देशमुख, रणजीत महल्ले, संतोष अनासाने, राजेश हिरोडकर, रामरतन मेटांगे, थिराज वाकोड़े, मयूर देशमुख आदि मौजद रहे थे।

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