Akola News: गर्मियों की छुट्टियों का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए इस बार की छुट्टियां केवल कागजों पर ही रह जाएंगी. पिछले दो वर्षों से लगातार विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की चुनावी ड्यूटी में व्यस्त रहे शिक्षकों को अब जनगणना का काम सौंपा गया है.
इस कारण छुट्टियों में भी उन्हें कर्तव्य निभाना पड़ेगा, जिससे शिक्षक वर्ग में तीव्र नाराज़गी फैल गई है. शिक्षक संघों का कहना है कि लगातार अशैक्षणिक कार्यों के बोझ से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अब हक़ की छुट्टियों में भी काम थोपना अन्याय है.
शिक्षक समिति के जिला अध्यक्ष राजेश देशमुख ने मांग की है कि इस काम के बदले अर्जित अवकाश दिया जाए या इसे छुट्टियों के अलावा अन्य समय में कराया जाए. शिक्षण विभाग ने विदर्भ की शालाओं के लिए 2 मई से 26 जून तक गर्मी की छुट्टियां घोषित की हैं, लेकिन इसी अवधि में 16 मई से 26 जून तक जनगणना का कार्य करने का आदेश जारी किया गया है.
जिला परिषद, निजी अनुदानित और महानगरपालिका शालाओं के शिक्षक भी इस काम में नियुक्त किए जाएंगे. कई शिक्षकों ने छुट्टियों में यात्रा, धार्मिक कार्यक्रम और पारिवारिक योजनाएं पहले से तय कर रखी थीं, लेकिन जनगणना के आदेश से उन्हें आरक्षण रद्द करना पड़ा और पूरा पारिवारिक नियोजन बिगड़ गया.
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनगणना कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है और समय पर पूरा करना अनिवार्य है. इसके लिए शिक्षकों को मुख्यालय न छोड़ने का आदेश दिया गया है. बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.इस निर्णय से शिक्षक वर्ग में असंतोष और नाराज़गी बढ़ गई है तथा प्रशासन से पुनर्विचार की मांग जोर पकड़ रही है।