चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस के बागी पार्षदों को झटका, हाई कोर्ट ने विभागीय आयुक्त के आदेश पर लगाई रोक
Congress Group Leader Controversy: चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस के गटनेता पद को लेकर चल रहे विवाद में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।
Chandrapur Municipal (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Chandrapur Congress Dispute: चंद्रपुर महानगरपालिका में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी कलह के चलते कांग्रेस पार्टी के गटनेता पद को लेकर दो गुटों में सीधी टक्कर हो गई। हालांकि बगावती पार्षदों की मदद से सुरेन्द्र विट्ठलराव अडबाले गटनेता तो चुन लिए गए, किंतु विभागीय आयुक्त के इस फैसले को चुनौती देते हुए पूर्व गटनेता राजेश मुरली अड्डूर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने विभागीय आयुक्त की ओर से 17 जून 2026 को दिए गए फैसले पर रोक लगा दी। जिससे कांग्रेस के बगावती पार्षदों को तगड़ा झटका लगा है।
चंद्रपुर शहर महानगरपालिका में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के गटनेता राजेश मुरली अड्डूर थे। विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी के कुछ पार्षदों ने गटनेता बदलने की कवायद शुरू की। इसके लिए 14 और 15 जून 2026 को एक बैठक बुलाई गई। राजेश अड्डूर ने इस बैठक को पूरी तरह से गैरकानूनी और अवैध करार देते हुए पार्टी का व्हिप जारी किया था। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जो भी नगरसेवक इस अवैध बैठक में शामिल होगा और किसी भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेगा, उसके खिलाफ महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण सदस्य अयोग्यता अधिनियम, 1986 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
व्हिप का उल्लंघन और अयोग्यता की तलवार
गटनेता राजेश अड्डूर के अनुसार 15 जून 2026 की बैठक बुलाने का अधिकार संबंधित व्यक्तियों को नहीं था। इसके बावजूद कुछ सदस्यों ने बैठक में हिस्सा लिया। अड्डूर के गुट ने इसे गटनेता के व्हिप का सीधा उल्लंघन माना है और उन सदस्यों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू कर दी है।
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इस राजनीतिक ड्रामे के बीच नागपुर संभाग की विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने 17 जून 2026 को एक अहम आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत राजेश अड्डूर की गटनेता के रूप में की गई पूर्व की प्रविष्टि को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। साथ ही सुरेंद्र विट्ठलराव अडबाले को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, चंद्रपुर शहर महानगरपालिका गट का नया गटनेता घोषित कर दिया गया।
पक्ष सुने बगैर ही दिया था फैसला
इस प्रशासनिक फेरबदल से पहले ही राजेश अड्डूर ने 16 जून को विभागीय आयुक्त को पत्र लिखकर मांग की थी कि गटनेता बदलने के किसी भी अवैध प्रस्ताव पर फैसला लेने से पहले उनका पक्ष सुना जाए। प्रशासनिक आदेश पारित होने के बाद राजेश अड्डूर ने 17 जून 2026 को न्यायालय में एक दीवानी मुकदमा दायर कर दिया।
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इसके साथ ही उन्होंने चंद्रपुर महानगरपालिका के आयुक्त को एक पत्र सौंपकर अपील की है कि चूंकि यह मामला अब न्यायप्रविष्ट है, इसलिए अदालत का अगला आदेश आने तक प्रशासन अपनी तरफ से गटनेता में बदलाव को लेकर कोई भी नया आदेश पारित न करे, अन्यथा इससे कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
