भेंडवल की पारंपरिक भविष्यवाणी 20 अप्रैल को होगी घोषित, अक्षय तृतीया पर होगी घट रचना
बुलढाणा के भेंडवल में अक्षय तृतीया पर होने वाली 350 साल पुरानी घट रचना से मानसून और फसलों का पूर्वानुमान 20 अप्रैल को घोषित होगा, जिस पर महाराष्ट्र के किसानों की गहरी आस्था है।
Shegaon Bhendwal Bhavishyavani News: शेगांव तहसील के भेंडवल गांव में हर वर्ष की तरह इस बार भी पारंपरिक ‘घट रचना’ को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लगभग 350 वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा के आधार पर मौसम, फसल, आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों का पूर्वानुमान लगाया जाता है, जिस पर प्रदेशभर के किसान गहरा भरोसा रखते हैं।
इस वर्ष अक्षय तृतीया के दिन घट रचना की जाएगी, जबकि 20 अप्रैल को इसकी आधिकारिक भविष्यवाणी घोषित की जाएगी। परंपरा के अनुसार, चंद्रभान महाराज के वंशज विधिवत पूजा-अर्चना के बाद घट रचना करते हैं और उसके संकेतों के आधार पर वर्षभर के हालातों का आकलन प्रस्तुत करते हैं।
पिछले वर्षों में इस परंपरा के आधार पर किए गए कई अनुमान वास्तविक परिस्थितियों के काफी करीब साबित हुए हैं, जिससे किसानों का विश्वास और भी मजबूत हुआ है। यही कारण है कि विदर्भ समेत महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से किसान इस भविष्यवाणी का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
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पिछले वर्ष के पूर्वानुमान काफी हद तक सटीक
पिछले वर्ष भेंडवल की भविष्यवाणी में कई फसलों और मौसम के बारे में जो आकलन किया गया था, वह काफी हद तक सही साबित हुआ। कपास की फसल सामान्य रहने का अनुमान था और उत्पादन भी उसी अनुरूप रहा। ज्वार के उत्पादन और कीमत सामान्य रहने की बात कही गई थी, जिसके तहत बाजार में ज्वार का भाव लगभग 3200 रुपये तक पहुंचा।
मूंग और तुअर की फसल को लेकर किए गए अनुमान भी सही साबित हुए। तुअर के उत्पादन को संतोषजनक बताया गया था और कीमत सामान्य रहने की बात कही गई थी। तिल के उत्पादन और कीमत दोनों अच्छे रहने की भविष्यवाणी भी काफी हद तक सटीक रही। गेहूं के उत्पादन और दाम में वृद्धि का अनुमान भी सही साबित हुआ, जबकि चने के मामले में हल्की बढ़ोतरी देखी गई।
बारिश के पूर्वानुमान भी रहे करीब
मौसम को लेकर भी भेंडवल की भविष्यवाणी काफी हद तक वास्तविकता के अनुरूप रही। जून महीने में कम और अनियमित बारिश की आशंका जताई गई थी, जिसके चलते बुवाई प्रभावित हुई। जुलाई में पर्याप्त बारिश की संभावना बताई गई थी, जिससे बुवाई कार्य शुरू हो सका।
अगस्त महीने में भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी, जिसके चलते मराठवाड़ा और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में तेज बारिश से नुकसान भी हुआ। विदर्भ के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई, हालांकि बुलढाणा जिले के कुछ हिस्सों में वर्षा अपेक्षाकृत कम रही।
राजनीतिक और आर्थिक संकेत भी रहे सटीक
भेंडवल की घट रचना केवल कृषि और मौसम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों का भी संकेत देती है। पिछले वर्ष यह अनुमान लगाया गया था कि सरकार स्थिर रहेगी, लेकिन कुछ हद तक तनाव बना रहेगा। वास्तविक परिस्थितियों में भी यही स्थिति देखने को मिली।
आर्थिक उतार-चढ़ाव और सीमित अस्थिरता के संकेत भी दिए गए थे, जो काफी हद तक सही साबित हुए। रक्षा व्यवस्था को लेकर भी छोटे-मोटे घटनाक्रम की संभावना जताई गई थी, जिनका कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा।
350 वर्षों पुरानी परंपरा
- भेंडवल गांव में करीब 350 वर्षों से घट रचना की परंपरा जारी
- अक्षय तृतीया पर चंद्रभान महाराज के वंशज करते हैं अनुष्ठान
- बारिश, फसल, अर्थव्यवस्था और राजनीति का किया जाता है पूर्वानुमान
- किसानों के लिए फसल योजना का महत्वपूर्ण आधार
- हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और किसान होते हैं शामिल
भेंडवल की यह परंपरा आज भी किसानों के लिए मार्गदर्शक मानी जाती है। अब सभी की नजरें 20 अप्रैल को घोषित होने वाली भविष्यवाणी पर टिकी हैं, जिससे आगामी खरीफ सीजन की दिशा तय होने की उम्मीद है।
