अकोला जिला: नल जल योजना के बीच दम तोड़ते हैंडपंप तस्वीर ( सोर्स: नवभारत)
Rural Development News: अकोला जिले में बढ़ती पानी की किल्लत के बीच ग्रामीण नागरिकों के लिए हैंडपंप आज भी जीवनरेखा बने हुए हैं। हालांकि नल जल योजना लागू होने के बाद प्रशासन का ध्यान हैंडपंपों से हट गया है। इसका नतीजा यह है कि कई गांवों में हैंडपंप बंद पड़े हैं और ग्रामीणों को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में कुल 4,938 हैंडपंप हैं, जिनमें से 35 गांवों के हैंडपंप पूरी तरह बंद हैं। इनकी दुरुस्ती के लिए 75 लाख रुपये तथा हैंडपंप सामग्री की खरीद के लिए 25 लाख रुपये, इस प्रकार कुल 1 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप बार-बार खराब हो रहे हैं।
पंचायत समितियों में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी दुरुस्ती पथक समय पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अकोला जिला परिषद और ग्राम पंचायतों को मिलने वाला निधि सीमित होने के कारण कई स्थानों पर दुरुस्ती के प्रस्ताव मंजूर होने के बावजूद निधि वितरण में देरी हो रही है। इससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
यह भी पढ़ें:- अकोला पुलिस सिपाही भर्ती शुरू, 719 सफल; SP अर्चित चांडक ने उम्मीदवारों से की ‘सावधान’ रहने की अपील
अकोला ग्राम पंचायतों और नागरिकों ने सरकार से अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्राम शिसा बोंदरखेड के सरपंच नंदकिशोर गोरले ने कहा कि यदि गर्मी शुरू होने से पहले हैंडपंपों की दुरुस्ती पूरी नहीं हुई, तो पानी की समस्या और गंभीर हो जाएगी। प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
जिला प्रशासन की ओर से हैंडपंप दुरुस्ती के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पंचायत समिति स्तर पर शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। दुरुस्ती पथक द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है और नियमानुसार दुरुस्ती कार्य शुरू है।