
Nashik Solapur Highwayनासिक-सोलापुर 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Solapur Distance: नासिक से सोलापुर की दूरी अब पहले से कहीं अधिक तेज़ और आरामदायक तरीके से तय की जा सकेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़े हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है, जो राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर मैप में बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की जानकारी दी।
यह प्रोजेक्ट पश्चिमी भारत को सीधे दक्षिण भारत से जोड़ने में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में कुल 20,668 करोड़ रुपये के दो हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। इसमें महाराष्ट्र में नासिक से सोलापुर तक 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण शामिल है।
यह प्रोजेक्ट BOT (Build-Operate-Transfer) मॉडल पर लागू किया जाएगा, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा BOT हाईवे प्रोजेक्ट बन जाएगा। केंद्र सरकार के इस फैसले से नासिक, अहिल्यानगर और सोलापुर जिलों के विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
नासिक से सोलापुर (अक्कलकोट) तक बनने वाले 374 किलोमीटर लंबे 6-लेन हाईवे पर करीब 19,142 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस नए कॉरिडोर के चलते नासिक और सोलापुर के बीच की दूरी करीब 14 प्रतिशत कम हो जाएगी। वर्तमान में यह दूरी 432 किलोमीटर है, जो घटकर 374 किलोमीटर रह जाएगी। खास बात यह है कि इस रूट पर वाहनों की औसत गति 60 किमी/घंटा से बढ़कर 100 किमी/घंटा तक पहुंच जाएगी, जिससे यात्रियों का काफी समय बचेगा।
यह नया हाईवे केवल नासिक और सोलापुर को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि यह सूरत-चेन्नई हाई-स्पीड कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। इस पूरे कॉरिडोर के पूरा होने पर सूरत से चेन्नई की यात्रा का समय 45 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। वर्तमान में यह सफर करीब 31 घंटे का है, जो घटकर 17 घंटे रह जाएगा। यह मार्ग महाराष्ट्र के चार प्रमुख जिलों—नासिक, अहिल्यानगर, धाराशिव और सोलापुर से होकर गुज़रेगा।
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इस मेगा प्रोजेक्ट को अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हाईवे के निर्माण के दौरान 27 बड़े पुल और 164 छोटे पुल बनाए जाएंगे। यह परियोजना PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत लागू की जा रही है, जिससे औद्योगिक, कृषि और वाणिज्यिक क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस प्रोजेक्ट से मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में संचार व्यवस्था और कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आने की उम्मीद है।






