पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले पति को 7 साल की सजा, 5 आरोपी बरी
Suicide Abetment Case: अकोला में पत्नी को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देकर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में अदालत ने पति आशीष नागे को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
Sentenced 7 Year सोर्सः फाइल फोटो-सोशल (मीडिया)
Akola Court Verdict: पत्नी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश डी.पी. सातवलेकर ने आरोपी आशीष नागे 32, निवासी पैलपाड़ा को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उस पर एक हजार रु. का जुर्माना भी लगाया है तथा जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 498ए के तहत एक वर्ष के कारावास और 500 रु. जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।
हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में अन्य 5 आरोपियों को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। मामले की शिकायत नंदा साबले, निवासी मांजरी, तह.बालापुर ने उरल पुलिस थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उनकी पुत्री जयश्री नागे 25 का विवाह आशीष नागे के साथ हुआ था। विवाह के बाद 26 अप्रैल 2021 से 23 अगस्त 2022 के दौरान पति आशीष नागे, ससुर वसंतराव नागे, सास शोभा नागे, देवर नितिन नागे, ननद जयश्री खराटे तथा शारदा जामनिक द्वारा पीड़िता के चरित्र पर संदेह कर उसके साथ अपमानजनक व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना बनी मौत की वजह
शिकायत में यह भी कहा गया था कि विवाह के समय मांगे गए 5 लाख रु. में से ढाई लाख रु. दिए जाने के बावजूद शेष ढाई लाख रु. के लिए जयश्री पर लगातार दबाव बनाया जाता था और उसे प्रताड़ित किया जाता था। साथ ही जयश्री ने अपनी मां को बताया था कि उसके पति आशीष नागे के अन्य महिलाओं के साथ अनैतिक संबंध भी हैं, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान थी। जयश्री नागे बी.ई. इलेक्ट्रिकल की शिक्षित युवती थीं। 10 मई 2022 को बेटी को जन्म देने के बाद भी उसे पुत्री होने के कारण ताने और अपमान का सामना करना पड़ता था।
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पति ने किया था अपमान
23 अगस्त 2022 को उपचार के लिए अकोला में डॉक्टर के पास लाए जाने पर भी पति द्वारा अपमानित किए जाने से वह अत्यधिक तनाव में आ गई थी। इसके बाद मायके में रहते हुए उसने पंखे से साड़ी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस प्रकरण में उरल पुलिस ने अपराध दर्ज कर तत्कालीन पुलिस उपनिरीक्षक सागर गोमासे द्वारा जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील श्याम खोटरे ने प्रभावी पैरवी की।
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पति दोषी ठहरा
पैरवी अधिकारी सहायक पुलिस उपनिरीक्षक अनवर खान, उकंडा जाधव तथा हेड कांस्टेबल प्रवीण माथने ने सहयोग किया। 7 गवाह पेश किए गए न्यायालय में सरकारी पक्ष ने सात गवाहों की गवाही और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर न्यायालय ने पति आशीष नागे को दोषी ठहराया। हालांकि, वसंतराव नागे, शोभा नागे, नितिन नागे, जयश्री खराटे और शारदा जामनिक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उन्हें बरी कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि सहआरोपी वसंतराव नागे पंचायत समिति के पूर्व सभापति रह चुके हैं।
