चक्रव्यूह में फसे ओमराजे निंबालकर से मिले शिंदे गुट के बड़े नेता, क्या फेल होगा ऑपरेशन टाइगर?
Operation Tiger Maharashtra: पवनराजे मर्डर केस में पद्मसिंह पाटील के बरी होने के बाद ओमराजे निंबालकर से मिले शिंदे गुट के नेता। क्या महाराष्ट्र की सियासत में फेल होगा ऑपरेशन टाइगर? पूरी खबर पढ़ें।
- Written By: गोरक्ष पोफली
ओमराजे निंबालकर (सोर्स: फाइल फोटो)
Shinde Faction Leader Meet Omraje Nimbalkar: महाराष्ट्र की राजनीति को दो दशकों तक आंदोलित करने वाले पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में 20 जून 2026 को आया अदालत का फैसला न केवल कानूनी रूप से चौंकाने वाला रहा, बल्कि इसने राज्य के सियासी समीकरणों को भी हिलाकर रख दिया है। 20 साल के लंबे इंतजार के बाद जब विशेष अदालत ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटील सहित सभी आरोपियों को निर्दोष बरी कर दिया, तो सांसद ओमराजे निंबालकर के लिए यह किसी गहरे सदमे से कम नहीं था।
‘कलयुग’ का दर्द और घर के बाहर पुलिस का पहरा
इस फैसले के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में ओमराजे निंबालकर ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि कलयुग में बुराई को ताकत मिलती है, और अच्छाई को सफलता नहीं मिलती। जैसे ही यह खबर फैली, पुणे स्थित उनके आवास पर तनाव और हलचल बढ़ गई। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की 5 टुकड़ियां ओमराजे के घर के बाहर तैनात कर दी गईं।
शिंदे गुट की घेराबंदी और बढ़ता सस्पेंस
अदालती फैसले के तुरंत बाद राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। शिंदे गुट की शिवसेना के कार्यकर्ताओं का ओमराजे के घर पर जमावड़ा लग गया। मावल के सांसद श्रीरंग बारणे और पुणे के पदाधिकारी नाना भानगिरे ने तुरंत ओमराजे के निवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात को शिंदे गुट द्वारा ओमराजे को अपने पाले में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, ओमराजे ने फिलहाल सस्पेंस बरकरार रखा है और कहा है कि वे अगले दो दिनों में अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से बात कर अपनी अंतिम भूमिका तय करेंगे।
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चक्रव्यूह में फंसे ओमराजे?
इस बीच, उद्धव ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि ओमराजे निंबालकर इस समय एक चक्रव्यूह में फंस गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ओमराजे की मां पिछले 20 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रही थीं और उन्हें न्याय मिलना चाहिए था। अंधारे ने इस बात पर चिंता जताई कि क्या ओमराजे इस राजनीतिक और कानूनी चक्रव्यूह को भेद पाएंगे।
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अटूट वफादारी का दावा
राजनीतिक चर्चाओं के बीच ओमराजे निंबालकर ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि वे ठाकरे परिवार के खिलाफ हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, मैंने आदित्य ठाकरे या उद्धव ठाकरे पर कभी टीका-टिप्पणी नहीं की है और न ही कभी करूंगा।
अब महाराष्ट्र की नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं। क्या ओमराजे अपनी मां के लिए न्याय की लड़ाई को उच्च न्यायालय तक ले जाएंगे, या फिर शिंदे गुट का हिस्सा बनकर अपनी राजनीति की नई दिशा तय करेंगे? फिलहाल, पुणे से लेकर दिल्ली तक इस मामले ने भारी हड़कंप मचा रखा है।
