अकोला: MGNREGA की जगह आई VB-G RAM G योजना, पुराने काम अटके, नए का हो रहा इंतजार
Akola Rural Employment News: केंद्र की नई ‘वीबी-जी राम जी’ योजना लागू न होने से ग्रामीण मजदूर बेरोजगार हैं। मनरेगा की जगह लाई गई योजना पर विरोध भी, केंद्र-राज्य खर्च हिस्सेदारी से चिंता बढ़ी।
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Viksit Bharat Scheme 2026: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025 में मंजूर की गई ‘विकसित भारत-गैरंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी-जी राम जी’ योजना को ग्रामीण रोजगार की नई दिशा माना जा रहा है। यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह लाई गई है। हालांकि अभी तक इसका क्रियान्वयन शुरू नहीं हुआ है, जिसके कारण ग्रामीण मजदूरों को काम मिलने की प्रतीक्षा बनी हुई है।
वहीं, पुरानी मनरेगा की कई परियोजनाएं अधूरी होने से भी कठिनाई उत्पन्न हो रही है। मनरेगा ने ग्रामीण भारत को रोजगार का अधिकार देकर आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखी थी। गरीबों के न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के लिए मनरेगा को जारी रखना आवश्यक 1974 में ‘रोजगार गारंटी योजना’ कानून लागू किया गया था, जिससे गरीब ग्रामीण नागरिकों को राहत मिली।
मनरेगा एक केंद्रीय योजना थी, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। रोजगार निर्माण का नियोजन और क्रियान्वयन ग्राम पंचायत, तहसील पंचायत और जिला पंचायत अपनी आवश्यकताओं के अनुसार करती थीं। मनरेगा में काम करने वालों में लगभग 60 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के मजदूर थे, जिनमें से 50 प्रतिशत महिलाएं थीं। अब जब नई योजना ‘जी राम जी’ लाई गई है, तो मजदूरों को रोजगार मिलने की प्रतीक्षा है। लेकिन इस योजना को लेकर विरोध भी सामने आ रहा
है। आलोचकों का कहना है कि यह केवलमनरेगा का नाम बदलना नहीं है, बल्कि मनरेगा को बंद करने की शुरुआत है।
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केंद्र-राज्य की साझा जिम्मेदारी
‘जी राम जी’ को केंद्रीय योजना न बनाकर केंद्र पुरस्कृत योजना घोषित किया गया है। इसका अर्थ है कि पहले की तरह केंद्र सरकार 100 प्रतिशत खर्च नहीं करेगी। अब खर्च का अनुपात केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य 40 प्रतिशत होगा। वहीं साधन-सामग्री पर खर्च का अनुपात 75 और 25 प्रतिशत तय किया गया है। ग्रामीण मजदूरों और किसानों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। नई योजना ‘जी राम जी’ से उम्मीदें जुड़ी हैं, लेकिन जब तक इसका क्रियान्वयन शुरू नहीं होता, तब तक ग्रामीण मजदूरों के हाथों को काम मिलने की प्रतीक्षा बनी रहेगी।
